हिमाचल में कार्टन की आड़ में बागवानों का आर्थिक शोषण हो रहा है। सरकार भी कारगर कदम नहीं उठा सकी है। टेलीस्कोपिक कार्टन में सेब बेचने से बागवानों को इसका पूरा दाम नहीं मिल रहा है। हर साल वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। बीस किलो का टेलीस्कोपिक कार्टन वैसे तो बीस किलो का होता है, लेकिन आढ़ती 32 किलो सेब भरने पर ही पेटी का दाम देते हैं। देश की विभिन्न मंडियों में बागवानों को बीस किलो सेब के दाम दिए जाते हैं।
मंडियों में किसानों-बागवानों को फसलों के दाम तोल के हिसाब से दिए जाते हैं, लेकिन सेब के मामले में ऐसा नहीं होता। पेटी में बीस किलो से अधिक मात्रा में सेब भरे हैं तो बागवानों को सिर्फ बीस किलो के हिसाब से ही रेट दिया जाता है। प्रदेश के बागवान लंबे समय से यूनिवर्सल कार्टन उपलब्ध कराने का मामला उठाते रहे हैं। पूर्व कांग्रेस सरकार से भी मांग की जाती रही थी, लेकिन कोई कदम नहीं उठाए गए।
क्या कहते हैं बागवान नेता
प्रदेश सब्जी एवं फल उत्पादक संघ अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि जब तक यूनिवर्सल कार्टन अनिवार्य नहीं किया जाएगा, तब तक बागवानों को सेब के पूरे दाम नहीं मिलेंगे। टेलीस्कोपिक कार्टन में बीस किलो के बदले 28 से 32 किलो सेब भरा जा सकता है। यूनिवर्सल कार्टन में सिर्फ दस या बीस कि लो सेब ही आएगा। बागवानी मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया है कि यूनिवर्सल कार्टन उपलब्ध कराए जाएं। सरकार इस साल यूनिवर्सल कार्टन उपलब्ध कराने को कानून बनाने की बात भी कह चुकी है।
क्या है यूनिवर्सल कार्टन
विदेशों में भी यूनिवर्सल कार्टन में सेब पैकिंग की जाती है। इसमें ज्यादा सेब भरने की गुुंजाइश नहीं रहती। टेलीस्कोपिक कार्टन दो लेयर होता है और इसमें 28 से 32 किलो सेब भरा जा सकता है।