प्राकृतिक खेती से तैयार सेब को मंडियों में उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। इससे किन्नौर के बागवान परेशान हैं। हालांकि, सरकार सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि ऑर्गेनिक सेब को बेचने के लिए अलग से मार्केट उपलब्ध नहीं करवा पाई है। कृषि विभाग के 2018-19 के आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 130 बागवानों को विभाग ने प्राकृतिक खेती खुशहाल योजना के तहत प्रमाण पत्र जारी किए हैं।
बागवानों के अनुसार प्राकृतिक खेती से तैयार सेब के लिए बहुत मेहनत की जरूरत रहती है। अगर ऑर्गेनिक सेब के लिए अलग से मार्केट बनाई जाए तो बड़े-बड़े शहरों से खरीदार भी आ सकते हैं। उन्होंने सरकार से मांग है कि ऑर्गेनिक सेब का दाम रसायन खेती के सेब से अधिक दिया जाए। मार्केट भी उपलब्ध करवाई जाए।
मूरंग के प्रगतिशील बागवान जीत सिंह नेगी ने कहा कि 15 बीघा जमीन पर ऑर्गेनिक सेब के पौधे तैयार किए हैं। दो बार प्राकृतिक खेती पर दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में भाग लिया है। 2019 से ऑनलाइन दिल्ली, मुंबई, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सेब बिकता है। चांगो के शेखर राज के पिता कृष्ण चंद नेगी ने कहा कि 25 बीघा जमीन पर प्राकृतिक खेती से सेब का बगीचा तैयार किया है।
इस वर्ष आठ हजार सेब छोटे बॉक्स उत्पादन का अनुमान है। सरकार ने अभी तक अलग से मार्केट नहीं बनाई है। इस कारण रसायन सेब के साथ बेचना पड़ रहा है और उचित दाम भी नहीं मिल रहे हैं। प्रगतिशील बागवान राधा नेगी ने कहा कि रसायनिक सेब में चमक जरूर है, पर रस कम और अधिक समय तक नहीं रह पाता है।
प्राकृतिक खेती सेब जिसका ओरिजिनल स्वरूप और कोई चमक दमक नहीं है, खाने में स्वाद, कोई बीमारी नही, लंबे समय तक रख सकते हैं। वन निगम उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने कहा कि सरकार ने टापरी सेब मार्केट में दुकान अलॉट किया है। किन्नौर के बागवानों को ऑर्गेनिक सेब बेचने के लिए जागरूकता होना जरूरी है। प्राकृतिक खेती के उत्पादकों के लिए प्रचार और प्रसार भी होना चाहिए।
डॉ. बलवीर ठाकुर उप परियोजना निदेशक आत्मा किन्नौर ने कहा कि टापरी सेब मार्केट में एक दुकान प्राकृतिक खेती के लिए उपलब्ध है, एनजीओ या किसान-बागवान को देनी है, लेकिन कोई भी आगे नहीं आ रहा है।