हिमाचल में सेब सीजन शुरू होने वाला है। अभी तक सरकार मजदूरों और लदानियों की व्यवस्था नहीं कर पाई है। इससे सेब बागवानों की उड़ी नींद उड़ने लगी है। वे लंबे समय से सरकार से मांग कर रहे हैं कि सेब सीजन से पहले लदानियों और श्रमिकों की व्यवस्था करे, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। उधर, मामले की गंभीरता समझते हुए सरकार ने मजदूरों की व्यवस्था करने का जिम्मा अफसरशाही और जिला प्रशासन को सौंप दिया है।
प्रदेश सब्जी एवं फल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि सेब सीजन से पहले सरकार को लदानियों और श्रमिकों को हिमाचल लाने के लिए वाहनों की व्यवस्था करनी चाहिए। हरीश चौहान ने कहा कि सरकार ने जो नए निर्देश किए हैं, उससे बागवानों को थोड़ी राहत मिलेगी। श्रमिकों और लदानियों को क्वारंटीन करने के लिए स्वास्थ्य विभाग, प्रधान और आशा वर्कर को जिम्मेदारी दी जाए।
प्रदेश में कुल सेब उत्पादन का 45 फीसदी हिस्सा शिमला जिले में पैदा किया जाता है। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां भी विकट हैं। बागवान नेपाली मजदूरों से बगीचों में काम कराते हैं। इस बार नेपाली श्रमिकों के हिमाचल आने पर संशय बना हुआ है। बागवानों का कहना है कि प्रदेश में 15 जुलाई के बाद से सेब सीजन में तेजी आती है। इससे पहले श्रमिकों और लदानियों की व्यवस्था करनी पड़ेगी। क्वारंटीन के लिए क्षेत्र के प्रधान और आशा वर्करों को जिम्मेदारी सौंपने का मामला भी उठाया जा रहा है।