हिमाचल में साल दर साल सेब पैदावार में गिरावट दर्ज हो रही है। इस बार सेब सीजन पिछले साल से कमजोर रहा है। इस सीजन में सेब की दो करोड़ पेटियों (कॉर्टन) की पैदावार भी मुश्किल से हो पाएगी। गत वर्ष जहां छह नवंबर तक करीब दो करोड़ पेटियों को बेच दिया गया था। इस दफा इस तिथि तक डेढ़ करोड़ पेटियां भी मार्केट में नहीं पहुंच पाई हैं।
जुलाई अंत में शुरू हुआ सेब सीजन 15 नवंबर तक खत्म हो जाएगा। इन दिनों किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों के केवल अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों से मंडियों में सेब पहुंच रहा है। सेब सीजन के इस अंतिम दौर में नाममात्र का सेब ही मार्केट पहुंच रहा है।
सरकार के बागवानी विभाग के अनुसार छह नवंबर तक करीब एक करोड़ 48 लाख पेटियां ही मंडियों में पहुंची हैं। कुछ सेब अदानी और अन्य कंपनियों ने भी खरीदकर अपने स्टोरों में रखा है। इसे जोड़ा जाए तो भी 15 नवंबर तक दो करोड़ पेटियों की पैदावार तक भी आंकड़ा शायद ही पहुंच पाए।
2010 का रिकॉर्ड नहीं टूट पा रहा
राज्य बागवानी निदेशालय के अनुसार वर्ष 2017 में कुल पैदावार 2,23,28,675 पेटियों की थी। हिमाचल में अब तक सबसे अच्छी फसल 2010 में 4.46 करोड़ पेटियों की हुई। यह रिकॉर्ड कभी नहीं टूटा। वर्ष 2015 में भी 3.88 करोड़ बक्सों की पैदावार हुई। राज्य में 6 से 10 करोड़ बक्सों की पैदावार हो सकती है। एक बक्से या पेटी में 20 से 25 किलो का माप रखा जाता है। कई बागवान एक पेटी में 28 किलोग्राम तक भरते हैं।
सेब पैदावार में गिरावट के ये कारण
राज्य बागवानी विभाग के निदेश्का डॉ. एमएल धीमान ने पुष्टि की कि इस बार सेब सीजन कमजोर है। अब तक डेढ़ करोड़ पेटियां भी मार्केट में नहीं पहुंची हैं। सेब पैदावार में गिरावट का प्रमुख कारण मौसम की बेरुखी है। सेब के पौधों की फ्लॉवरिंग और सेटिंग के दौरान इस बार मौसम अनुकूल नहीं रहा।
कृषि क्षेत्र के कमजोर होने के कारण आई विकास दर में गिरावट
हिमाचल में प्राइमरी सेक्टर यानी कृषि क्षेत्र के कमजोर होने के कारण विकास दर में गिरावट आई है। राज्य सरकार की ओर से हाल ही में किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में भी यह चिंता जाहिर की गई है।