बच्चों को दी जाने वाली सस्पेंशन दवा बनाने के लिए दिए जाने वाले स्टेरिल वाटर की शीशी में चींटियां मिलने का मामला सामने आया है। मामला हिमाचल के ऊना जिले का है। हालांकि दवा की एक्सपायरी डेट अभी वर्ष 2019 में पूरी
होगी, लेकिन बेहद संवेदनशील समझे जाने वाले शिशुओं को दी जाने वाली दवाओं की सुरक्षा में चूक से एक ओर जहां दवा निर्माता कंपनियों पर सवालिया निशान लग रहा है। दूसरी ओर दवा विक्रेताओं के काम पर भी उंगली उठ रही है।
जानकारी के मुताबिक सोमवार को स्थानीय बाजार से एक व्यक्ति ने अपने बच्चे के लिए ड्राई सीरप खरीदा, जिसे डॉक्टर के निर्देशानुसार साथ दिए स्टेरिल वाटर को मिला कर सस्पेंशन सीरप बनाया जाना था, लेकिन जब खरीदार ने घर में जाकर सीरप बनाने के लिए दवा का पैकेट खोला तो उसे देख उसके होश फाख्ता हो गए।
स्टेरिल वाटर की प्लास्टिक पैकिंग के अंदर और बाहर चींटियां चिपकी थीं। इनमें से कई तो उस पानी में मर भी चुकी थीं। खरीदार तुरंत उक्त दवा को लेकर केमिस्ट के पास वापस पहुंचा और इस बाबत शिकायत की।
उधर, ड्रग इंस्पेक्टर सन्नी कौशल का कहना है कि यह गंभीर मामला है। शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई होगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।