हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जंगी-थोपन प्रोजेक्ट मामले की सुनवाई 20 जून को निर्धारित की है। मंगलवार को मामले पर बहस पूरी न होने के कारण अदालत ने अदानी समूह और राज्य सरकार की दोनों अपीलों की सुनवाई एक साथ निर्धारित की है। बता दें कि किन्नौर जिले की जंगी-थोपन-पोवारी जल विद्युत परियोजना शुरू से ही विवादों में रही है। विदेशी कंपनी ब्रेकल के बाद अदानी समूह भी इस परियोजना को नहीं बनाना चाहता है। 960 मेगावाट के महत्वपूर्ण हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट ब्रेकल को वर्ष 2007 में आवंटित किया गया था। कंपनी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया और अपफ्रंट राशि जमा नहीं करवाई।
इसके बाद यह प्रोजेक्ट अदानी कंपनी को दिया गया। समूह ने प्रीमियम के तौर पर 280.06 करोड़ जमा करवाए। बाद में परियोजना के टेंडर को रद्द कर दिया। ब्रेकल कंपनी ने हिमाचल सरकार से पत्राचार किया और अगस्त 2013 को अदानी समूह के पार्टनर के तौर पर 280.06 करोड़ को ब्याज सहित वापस करने के लिए आग्रह किया। अक्तूबर 2017 में कैबिनेट मीटिंग में वीरभद्र सिंह सरकार ने फैसला लिया था कि अदानी समूह को पावर प्रोजेक्ट की 280 करोड़ की अपफ्रंट मनी वापस की जाएगी, लेकिन 5 दिसंबर, 2017 को सरकार ने अदानी ग्रुप पर दिखाई गई 280 करोड़ रुपये की मेहरबानी वाला फैसला वापस ले लिया।