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Himachal: केंद्र सरकार ने यूरोपियन यूनियन के सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाई, राठौर बोले- यह बागवानों से अन्याय

Thu, 29 Jan 2026 02:17 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 सेब बागवानों को मोदी सरकार ने एक और झटका दिया है। केंद्र ने यूरोपियन यूनियन के सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी 50 से घटाकर 20 प्रतिशत की है। 
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अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते के बाद अब यूरोपीय यूनियन (ईयू) के देशों से भारत आने वाले सेब पर आयात शुल्क 50 से घटाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। इससे हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों को एक और झटका लगा है। बागवानों का कहना है कि विदेश से आने वाले सेब के साथ हिमाचल का सेब स्पर्धा नहीं कर पाएगा, जिससे उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाएंगे। इससे पहले न्यूजीलैंड के सेब पर आयात शुल्क घटाया गया था। उधर, केंद्र सरकार के मुताबिक ईयू से केवल 50 हजार मीट्रिक टन सेब ही 20 प्रतिशत ड्यूटी पर भारत आएगा। इसमें न्यूनतम आयात मूल्य 80 रुपये प्रति किलो होगा। यह मात्रा सालाना एक लाख टन तक बढ़ सकती है और नया प्रावधान अगले 10 वर्षों के लिए ही प्रभावी रहेगा। भारत अभी ईयू से सेब के आयात पर लगभग 50 प्रतिशत ड्यूटी लगाता है।

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केंद्र ने स्पष्टीकरण दिया है कि यूरोपीय संघ से सीमित मात्रा में आयातित सेब पर ही 20 फीसदी आयात शुल्क होगा। यूनियन से आने वाले सेब पर न्यूनतम प्रभावी लैंडेड कीमत 96 रुपये प्रति किलोग्राम होगी। इससे घरेलू कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी और किसानों की आमदनी भी सुरक्षित रहेगी। आंकड़े बताते हैं कि भारत ने 2024 में लगभग पांच लाख टन सेब का आयात किया। लगभग 26 प्रतिशत यानी लगभग 1,33,447 टन ईरान, 23 प्रतिशत यानी लगभग 1,16,680 टन सेब तुर्की और 42,716 टन या 8.2 प्रतिशत अफगानिस्तान से आया। ईयू से केवल करीब 56,717 टन सेब भारत के लिए आयात किया गया। हिमाचल प्रदेश के बागवानों को चिंता है कि शुल्क कम किए जाने के बाद अब ईयू से भारत के लिए सेब का आयात बढ़ जाएगा।

ईयू से सेब का आयात शुल्क 50 से घटाकर 20 फीसदी करना हिमाचल के बागवानों के हितों पर कुठाराघात है। यह हिमाचल की सेब बागवानी को तबाह कर देगा। पहले न्यूजीलैंड के सेब पर आयात शुल्क घटाकर 25 फीसदी किया गया। इस मामले को केंद्र के समक्ष उठाया जा चुका है। अब ईयू से सेब आयात शुल्क घटाने के निर्णय का भी विरोध किया जाएगा।- जगत सिंह नेगी, बागवानी मंत्री
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यूरोपियन देशों के साथ नए समझौते के तहत सेब पर आयात शुल्क 50 से घटाकर 20 प्रतिशत करने का फैसला बागवान विरोधी है। सस्ता विदेशी सेब भारतीय बाजार में आने से स्थानीय सेब उत्पादकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। भाजपा सरकार विदेशी सेब को बढ़ावा दे रही है।- रोहित ठाकुर, शिक्षा मंत्री


यह फैसला बागवान विरोधी है। केंद्र सरकार हिमाचल के सेब बागवानों के साथ अन्याय कर रही है। यह निर्णय प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल नारे के साथ भी विरोधाभासी है। तुर्की और ईरान का सेब 50 फीसदी आयात शुल्क के बावजूद 48 रुपये प्रति किलो तक भारत की मंडियों में पहुंचा है। कहां बागवान 100 फीसदी आयात शुल्क की मांग कर रहे थे और कहां इसे घटाकर 20 फीसदी किया गया है। - हरीश चौहान, हिमाचल प्रदेश फल, फूल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष
 

सेब अर्थव्यवस्था हिमाचल की जीवनरेखा, आयात नीति में बागवानों के हितों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी: संदीपनी
 भाजपा प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने प्रदेश के सेब उत्पादकों की चिंताओं पर कहा कि हिमाचल की सेब आधारित अर्थव्यवस्था राज्य की जीवनरेखा है और बागवानों के हितों की रक्षा भाजपा तथा केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उत्पादकों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और किसी भी परिस्थिति में उनके हितों से समझौता नहीं होने दिया जाएगा। संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बागवानों के मन में जो प्रश्न और चिंताएं हैं, उन्हें सरकार गंभीरता से समझती है। सेब उत्पादन केवल एक फसल नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिकी, रोजगार और लाखों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है। ऐसे में यह जरूरी है कि हिमाचली सेब को बाजार में उचित मूल्य और संरक्षण मिले।

उन्होंने कहा कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का क्रियान्वयन 2027 में लागू होगा और सरकार के पास पर्याप्त समय है कि बागवानों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। न्यूनतम आयात मूल्य, गुणवत्ता मानक, बाजार नियंत्रण और सुरक्षा प्रावधानों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विदेशी सेब के आयात से हिमाचल के उत्पादकों को नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मत है कि हिमाचल के सेब उत्पादकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। सरकार बागवानों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी आशंकाओं का समाधान करेगी और सेब उद्योग को सुरक्षित रखने के लिए सभी आवश्यक नीतिगत उपाय अपनाएगी।  केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि हिमाचल के सेब को उचित समर्थन मूल्य, बेहतर बाजार और संरक्षण मिलता रहे। उन्होंने कहा कि हिमाचल के सेब उत्पादकों के हित सर्वोपरि हैं और मोदी सरकार उनके अधिकारों, सुरक्षा और समृद्धि के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी।
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कुलदीप राठाैर ने क्या कहा
वहीं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने यूरोपीयन देशों के साथ फलों विशेषतौर पर सेब आयात पर शुल्क घटाकर 20 प्रतिशत करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के सेब बागवानों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने न्यूजीलैंड के साथ भी आयात शुल्क कम किया है और अब यूरोपीय देशों के साथ भी आयात शुल्क कम करना विशेष तौर पर हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों जिसकी आर्थिकी फलों, सेब पर अधिकतर हो, उसे अपने राजनीतिक लाभ के लिए ध्वस्त करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। राठौर ने गुरुवार को जारी बयान में केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह अमेरिका के दबाव में देश की आर्थिकी को बर्बाद करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पांच हजार करोड़ की सेब आर्थिकी पर पहले ही संकट के बादल छाए हैं और केंद्र सरकार की किसान व बागवान विरोधी नीतियों से अब इसके अस्तित्व पर ओर भी खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि अमेरिका के साथ हाल ही में भारत के मुक्त व्यापार समझौते के तहत अन्य देशों के साथ भी ऐसे ही करार कर हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के सेब उत्पादन और इसके बाजार को खत्म किया जा रहा है। राठौर ने केंद्र सरकार से विदेशों से आने वाले फलों पर आयात शुल्क शत प्रतिशत करने की मांग दोहराते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री को प्रदेश के सेब बागवानों से किए गए अपने वादों को पूरा करना चाहिए।
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