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मंदिरों में 10 साल मन्नतें मांगने के बाद पैदा हुए थे अंकुश, 21 की उम्र में पाई शहादत

Fri, 19 Jun 2020 03:20 PM IST
Krishan Singh विजय ठाकुर, अमर उजाला, भोरंज (हमीरपुर)
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शहीद के घर में विलाप करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा के समीप गलवां में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प में शहीद भारतीय सेना के 20 जवानों में शामिल हिमाचल के हमीरपुर के अंकुश ठाकुर की पार्थिव देह आज शाम करीब चार बजे चंडीगढ़ से एंबुलेंस के जरिये  पैतृक गांव पहुंचेगी। सीएम जयराम ठाकुर भी शहीद के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। शहीद अंकुश अपनी खुद की कमाई के पैसों से गांव में घर के लिए थोड़ी सी जमीन और लग्जरी कार खरीदना चाहते थे। इसका जिक्र वह हमेशा अपने माता-पिता से घर पर और फोन पर किया करता था। परिवार वर्ष 2021 में अंकुश ठाकुर की शादी की तैयारियों में जुटा था। माता-पिता की शादी के 10 वर्ष बाद अंकुश ठाकुर के रूप में पहली संतान हुई थी।

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शादी के काफी समय बाद औलाद होने पर माता-पिता ने बड़े प्यार दुलार से बेटे की परवरिश की। पढ़ाया-लिखाया और जब वह 20 वर्ष का हुआ तो सेना में भर्ती हो गया। अंकुश से छोटा बेटा आदित्य भी अपने भाई से उम्र में 10 वर्ष छोटा है। छोटा बेटा आदित्य अभी 13 वर्ष का है और सातवीं कक्षा में पढ़ता है। इसलिए माता-पिता को बड़े बेटे अंकुश ठाकुर के सेना में भर्ती होने के बाद बेटे की शादी की जल्दी थी। शहीद की मां ऊषा देवी कहती हैं कि हम पति-पत्नी बुजुर्ग हो रहे हैं और छोटे बेटे की शादी को शायद हम रहें या ना रहें। इसलिए बड़े बेटे की शादी करना चाहते थे। लेकिन सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं।

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आदित्य बोला- नहीं चाहिए स्मार्ट फोन, बस भाई लौट आए

शहीद अंकुश ठाकुर का छोटा भाई 13 वर्षीय आदित्य ठाकुर कहता है कि बड़े भाई ने कहा था कि वह जल्द ही फौज से छुट्टी लेकर घर आएगा और उसे एंड्रायड स्मार्ट फोन खरीदकर देगा। आदित्य ने कहा कि उसे फोन नहीं चाहिए, बस भगवान बड़ा भाई लौटा दे। जब से बड़े भाई के शहीद होने की खबर मिली है, तब से आदित्य ने अन्न ग्रहण नहीं किया।

हालांकि, एक दिन और एक रात भूखा रहने पर परिजनों ने गुरुवार को जबरदस्ती आदित्य को खाना खिलाया। आदित्य कहता है कि जब उसके भाई ने कुछ नहीं खाया तो वह कैसे खाना खा सकता है। अब मैं सेना में भर्ती होकर बड़े भाई की शहादत का चीन से बदला लूंगा। 
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