अंतरराष्ट्रीय मंडी शिवरात्रि महोत्सव में जिला प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उपायुक्त ने जिन कारदारों को कमरूनाग को उनके मूल स्थान पर मनाने के लिए भेजा था, वे बैरंग लौट आए हैं।
कमरूनाग देवता के मूल स्थल कांढी (धंग्यारा) पहुंचकर निर्मल सिंह ठाकुर ने पूछ डलवाई तो देववाणी में पशु बलि प्रथा को बहाल करने के लिए कहा गया।
निर्मल ने दावा किया है कि देववाणी में कमरूनाग ने कहा - ‘मेरे साथ मेरे रक्षक देवता (गण) जब चलते हैं तो उनके लिए बलि होना अनिवार्य है। गण मुझे असुरी शक्तियों से बचाते हैं।