बोलीं, आईजीएमसी शिफ्ट करके महिलाओं को किया जा रहा परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल से इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट की स्त्री रोग ओपीडी से महिलाओं में असमंजस बरकरार है। महिलाओं को समझ नहीं आ रहा कि वह उपचार के लिए कहां जाए।
हालांकि वर्तमान में दोनों जगहों में ओपीडी सुचारू रूप से चल रही लेकिन उपचार के लिए आने वाली महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं गायनी ओपीडी को शिफ्ट करने के बाद राजनीति भी गरमाती जा रही है। जनवादी महिला समिति ने सरकार के फैसले को जनविरोधी बताया है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर सरकार फैसले को वापस नहीं लेती है तो महिलाएं प्रदर्शन करेंगी। सोमवार को कमला नेहरू अस्पताल की गायनी ओपीडी में काफी भीड़ थी। ओपीडी के बाहर महिलाओं ने खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार किया। वहीं आईजीएमसी में गायनी ओपीडी में कम महिला रोगी पहुंचीं।
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य कमेटी ने स्त्री रोग ओपीडी को कमला नेहरू अस्पताल से आईजीएमसी में शिफ्ट करने का विरोध किया है। संगठन ने सरकार के फैसले की कड़ी निंदा की है। आरोप है कि सरकार ने राज्य के एकमात्र मातृ एवं शिशु अस्पताल कमला नेहरू से स्त्री रोग की ओपीडी को आईजीएमसी में शिफ्ट करने से महिलाओं को परेशान किया है। कमला नेहरू अस्पताल ब्रिटिश के समय का अस्पताल है, जहां महिलाओं से संबंधित सभी रोगों का उपचार किया जाता है। सरकार महिलाओं को अगर रोबोटिक सर्जरी की सुविधा देना चाहती है, तो पहले व्यवस्थाओं की ओर ध्यान देना होगा।
आईजीएमसी में पहले ही मरीजों का बोझ है और सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में महिलाओं की गायनी ओपीडी को शिफ्ट करना बिल्कुल भी सही नहीं है। कमला नेहरू अस्पताल ऐसा संस्थान है जहां ज्यादा भीड़ भी नहीं है और महिला मरीज आसानी से उस अस्पताल में पहुंच सकती है। अस्पताल में महिलाओं को एक ही छत के नीचे ओपीडी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट, गायनी और एंटीनेटल, ऑपरेशन थियेटर, आपातकालीन सेवाएं और स्पेशल वार्ड की सुविधा है। जनवादी महिला समिति की राज्याध्यक्ष रंजना जरेट और राज्य सचिव फालमा चौहान ने कहा कि सरकार को निर्णय वापस लेना चाहिए। सरकार को चाहिए था कि पुराने भवनों की जगह नए भवन बनाकर महिलाओं को आधुनिक अतिरिक्त सुविधा दी जाए।