भारद्वाज ने कहा कि कक्षाओं में पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए अध्यापकों की रिटायरमेंट के लिए एक ही महीना और दिन तय किया जाएगा। बीच सत्र में कोई भी शिक्षक रिटायर नहीं होगा। किसी भी अध्यापक की रिटायरमेंट नहीं होगी।
भारद्वाज ने कहा कि उत्तर भारत के हिमालयी राज्यों की समस्याएं लगभग एक जैसी हैं। ऐसे में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में हिमालयी राज्यों के लिए अलग प्रावधान करने की मांग उठाई जाएगी।
इसके लिए हिमालयी राज्य हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के शिक्षा मंत्रियों और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों का एक सम्मेलन किया जाएगा। सम्मेलन में हिमालयी राज्यों के लिए शिक्षा नीति में इन राज्यों की भौगोलिक दृष्टि के अनुसार बदलाव की मांग की जाएगी।
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि सरकारी स्कूलों का कोई भी अध्यापक अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में ही पढ़ाने के लिए बाध्य नहीं है। लोकतंत्र में सभी को आजादी है।
भारद्वाज ने कहा कि सरकारी स्कूलों में कितने सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं, इसका आंकड़ा उनके विभाग के पास नहीं है। शिक्षा विभाग की तबादला नीति पर भारद्वाज ने साफ किया कि इसमें हिमाचल किसी भी दूसरे प्रदेश के मॉडल को कॉपी नहीं करेगा।