एसबीआई जनरल इंश्योरेंस को मुआवजा देना का आदेश रुचि सांख्यान शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल मेडिकल पर्ची पर शराब की गंध का उल्लेख होना इस बात का पुख्ता सबूत नहीं है कि चालक हादसे के वक्त शराब के नशे में था।
आयोग ने कहा कि जब तक रक्त या यूरिन की जांच से शराब की मात्रा साबित न हो बीमा कंपनी क्लेम खारिज नहीं कर सकती।आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कोताही का दोषी ठहराते हुए शिकायतकर्ता को वाहन की आईडीवी वैल्यू के तहत 1,57,801 रुपये 9 फीसदी ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपये हर्जाना और 15 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के भी निर्देश दिए गए हैं। पूरी राशि का भुगतान 45 दिन के भीतर करना होगा।
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चौपाल तहसील के निवासी मेलाराम ने अपनी गाड़ी का एसबीआई जनरल इंश्योरेंस से बीमा करवाया था जिसकी आईडीवी वैल्यू 1,58,801 रुपये थी। 11 मार्च 2022 को नेवटी के पास आवारा पशु को बचाते समय गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। घटना की सूचना पुलिस और बीमा कंपनी को दी गई। बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि एमएलसी में शराब की गंध लिखी होने के कारण चालक शराब के प्रभाव में था, जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। इसके खिलाफ मेला राम ने अधिवक्ता शशि भूषण के माध्यम से आयोग में शिकायत दर्ज करवाई।
आयोग ने दस्तावेजों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि बीमा कंपनी ने इन्वेस्टिगेटर की रिपोर्ट और एमएलसी की सामान्य फोटोकॉपी के आधार पर दावा खारिज किया। कंपनी यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई कि चालक के खून या यूरिन के नमूने लिए थे या वह इस कदर नशे में था कि उसने गाड़ी से नियंत्रण खो दिया था। जांचकर्ता का हलफनामा भी आयोग के समक्ष पेश नहीं किया गया।