क्षेत्र के देवी-देवताओं के थानेदार कहे जाने वाले देवता धूमल नाग का रथ नियम टूटने पर अपने स्थान से खुद ही चलना शुरू हो जाता है। मान्यता है कि रथ जमीन पर रखा होता है, लेकिन नियम टूटने पर यह खुद ही खिसकना शुरू हो जाता है। देव परंपराओं का निर्वहन करने के बाद ही ये देवता शांत होता है।
यह किस्सा एक बार नहीं कई बार हो चुका है। इसीलिए देवता के रथ को देव रस्सी के साथ बांधकर रखा गया होता है। यह देवता नाग का रूप है, जो नियम तोड़ने पर जल्दी क्रोध में आ जाता है। यही नहीं, मूल मंदिर में भी देवता के रथ को खोल कर अलग-अलग स्थानों पर रखा जाता है।