मारुति जिप्सी को ड्राइव करने वाले मोहाली के अमरतेज बुवाल 16वीं मारुति सुजुकी रेड डी हिमालया रेस के विजेता बने हैं। रेस का समापन शुक्रवार को मनाली में हुआ। छह दिन में 2200 किलोमीटर का सफर तय किया गया। बुवाल ने रेड एक्सट्रीम फोर बाई फोर को 10.35.41 घंटे के टाइम स्कोर से पूरा किया। कैप्टन अजयवीर सिंह गिल ने इस टॉप पॉजिशन को बुवाल से दो मिनट से मिस किया। वह दूसरे स्थान पर रहे।
उनका टाइम स्कोर 10.36.51 घंटे का रहा। उत्तराखंड के सितारंगज से करण जंग तीसरे स्थान पर रहे। उनका टाइम स्कोर 10.50.10 घंटे का रहा। दोनों कैप्टन अजयवीर सिंह गिल और जंग मारुति जिप्सी ड्राइव कर रहे थे। चंडीगढ़ से जगमीत गिल ने नेवीगेटर चंदन सेन के साथ ने हैटट्रिक के साथ रेड एडवेंचर में फर्स्ट ओवरऑल का स्थान पाया।
भारी स्नोफॉल पर भी नहीं रुके रफ्तार के दीवाने
वे मारुति जिस्पी ड्राइव कर रहे थे। जगमीत ने एक ही जिप्सी से तीसरी बार रेड एडवेंचर का टाइटल जीता। उनकी इस साल की कुल पेनल्टी 3.20 घंटे की है। रेड एडवेंचर में दूसरे स्थान पर नेवीगेटर नीरव मेहता के साथ कोलकाता के सुबीर रॉय रहे। वे भी मारुति जिप्सी चला रहे थे। उनकी कुल पेनल्टी 3.40 घंटे की थी।
तीसरे स्थान पर नेवीगेटर अरिंदम घोष के साथ रांची के आशीष बुधिया रहे। उनकी कुल पेनल्टी 4.53 घंटों की रही। रेड एडवेंचर में कार श्रेणी में श्रीनगर के राजेश चलाना प्रथम रहे। मारुति सुजुकी मार्केटिंग के उपाध्यक्ष मनोहर भट्ट ने कहा कि कुंजम ला में भारी स्नोफॉल के कारण रैली का चौथा दिन सस्पेंड हो गया। यह डर था कि रेड पूरी भी होगी कि नहीं। पर बारालाचा और नाकी ला में मौसम साफ रहा और अंतत: यह रेड सफल रही।
मोटरसाइकिल में बंगलूरू के नटराज आर प्रथम
रेड एक्सट्रीम मोटरसाइकिल में बंगलूरू के नटराज आर प्रथम रहे। दिल्ली के सुरेश बाबू द्वितीय और लुधियाना से सौरभ हांडा तीसरे स्थान पर रहे। कनाडा से एनआरआई निक सराओ चतुर्थ और चंडीगढ़ से संदीप मथारू का पांचवां स्थान रहा।
हर टर्न पर कुछ न कुछ सीखा
बालीवुड शोमैन सोहेल खान ने कहा कि उनका इस दौरान बहुत ही जबरदस्त अनुभव रहा। यह रेस लाइफ को बदलने वाली थी। हर टर्न पर कुछ न कुछ सीखा।
पहाड़ों की धुंध से हारे नौ बार के विजेता
नौ बार रेड दी हिमालया कार रैली जीतने वाले कुल्लू जिले के पतलीकूहल निवासी सुरेश राणा पर पहाड़ों की धुंध भारी पड़ गई। वीजिविलिटी कम होने, गाड़ी के टायर ठंडे होने और टायरों का सड़क पर ग्रिप नहीं बनने के चलते सुरेश राणा दसवीं बार कार रैली जीतने से महरूम रह गए। सुरेश राणा को कार रैली से बाहर होने का दुख है। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में सुरेश राणा ने अगले साल कड़ी मेहनत के साथ कार रैली में वापसी कर खिताब दोबारा अपने पास लाने का वादा किया है।
रेड डी हिमालया कार रैली में नौ बार चैंपियन रहे सुरेश राणा सरचू से नाका लेक जाते समय कार ट्रैक से बाहर लुढ़कने के चलते बाहर हुए। सुरेश राणा को इस दौरान हल्की चोटें भी आई हैं। सुरेश राणा ने बताया कि सुबह सवा छह बजे उन्होंने रैली शुरू की। सुबह के समय वीजिविलटी कम थी। 50 मीटर से आगे सड़क दिखाई नहीं दे रही थी।
टायर ठंडे थे, इस कारण सड़क पर ग्रिप लेवल भी कम था। उन्होंने बताया कि दुर्घटना के समय वह 8 मीटर की लीड पर थे और उनकी स्पीड 140 किलोमीटर थी। सुरेश राणा रैली के दौरान तीन दिन तक सबसे आगे रहे। कुंजुम पास और कॉमिक जैसे दुर्गम रास्तों पर भी वह प्रतिद्वंद्वियों पर भारी पडे़ थे, लेकिन सरचू से लेकर नाका लेक तक का मार्ग उनके लिए ठीक साबित नहीं हुआ। पहाड़ों की धुंध दसवीं बार उनके विजेता बनने के आडे़ आ गई।