बाजार में छाई सुस्ती और मंदी की आहट के बीच अमर उजाला ने सोमवार को मंडी जिला के कारोबारियों-उद्यमियों के लिए सकारात्मक पहल करते हुए अमर उजाला समृद्धि संवाद का आयोजन किया। युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट मनु द्विवेदी ने अमर उजाला के इस कार्यक्रम आर्थिक मंदी के बारे में विस्तृत जानकारी दी। हिमाचल और मंडी जिला के परिपेक्ष्य में उन्होंने कारोबारियों की शंकाओं का निदान किया और आर्थिक मंदी के डर को दूर भगाकर फेस्टिवल सीजन में सकारात्मक उर्जा के साथ डटने का आह्वान किया।
काराबोरियों की शंकाओं का निदान करते हुए सीए मनु द्विवेदी ने कहा कि आर्थिक मंदी से घबराने कि जरूरत नहीं है। हिमाचल खासकर जिला मंडी की व्यापारिक अर्थव्यवस्था कृषि, बागवानी के अलावा और सरकारी या निजी नौकरियों पर आधारित है। किसान, बागवान और नौकरीपेशा लोग ज्यादा संख्या में खरीदार हैं। इस बार मानसून अच्छा गया है। सेब की बंपर पैदावार हुई है। आने वाले समय में भी अन्य कृषि-बागवानी उत्पादों की अच्छी पैदावार की उम्मीद है।
वहीं सरकारी और निजी क्षेत्र में नौकरियों के द्वार भी काफी अधिक खुले हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं का खर्च में गिरावट कम होने के संकेत हैं। हर तरह की रिटेल से लेकर प्रोडक्शन यूनिट या ऑटोमोबाइल सेक्टर त्योहारी सीजन में बेहतर कारोबार की उम्मीद के साथ आगे बढ़ सकते हैं। वहीं, उपभोक्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार कर प्रणाली में भी काफी हद तक सरल कर रही है। जिसकी वजह से वजह से पैसा फिर से बाजार में आएगा। इसका असर देखने को भी मिला है। बाजार में उछाल दर्ज किया जा रहा है।
निवेश से संकोच ना करें
अधिकतर निवेशक आर्थिक मंदी के दौर में निवेश करने से संकोच करते हैं। सीए ने कहा कि उनकी निजी राय में यही समय निवेश करने के लिए बेहतर रहता है। क्योंकि इस वक्त लेबर और कच्चे या अन्य माल की कीमतें कम होती हैं। और सरकार की और से मिलने वाली रियायतों जैसे कि टैक्स, सब्सिडी का भरपूर फायदा उठाया जा सकता है। व्यापारियों को चाहिए कि सकारात्मक सोच रखते हुए अपने व्यापार, ग्राहक और मांग को समझें और मंदी से न डरें। मंदी एक अर्थव्यवस्था चक्र का हिस्सा होता है, इससे घबराने की जरूरत नहीं।
अफवाहों पर ध्यान न दें, बनाए रखें धैर्य
मंदी गहराने के साथ-साथ अफवाहें भी फैलती हैं। लिहाजा समय बड़े धैर्य से चीजों को समझने का होता है। निवेशकों को तो खासतौर से इन हालात में सब्र का परिचय देना चाहिए। समझने की जरूरत है कि मंदी जैसी स्थिति हमेशा के लिए है। चाहे अमेरिका हो या यूरोप, सभी देश आर्थिक मंदी के दौरे से गुजरे और ऊपर उठे हैं। धैर्य खोएंगे तो गलत फैसले ही लेंगे। बुरे समय में ही धैर्य की परीक्षा होती है।
गैर जरूरी खर्च बंद करें
मंदी में गैर-जरूरी खर्च को बिल्कुल न कह दें। आए दिन मौज-मस्ती पर बिना सोचे-समझे खर्च करना आपकी आर्थिक सेहत को बिगाड़ सकता है। सुरक्षित विकल्पों से पैसा नहीं निकाले। मंदी में पीपीएफ और सावधि जमा जैसे सुरक्षित विकल्पों में पैसा निकालना सही नहीं होगा।
राहत की किरण
मनु ने कहा कि बाजार में और तेजी की उम्मीद है। आरबीआई रेट कम करने पर विचार कर रहा है। ताकि बाजार में घूम रहा पैसा आ सके। व्यापारी वर्ग से लिए सुझावों पर सरकार काम कर रही है। जैसे कि कॉर्पोरेट टैक्स के अलावा व्यक्तिगत कारोबार के टैक्स को कम करने पर सरकार विचार कर रही है। इन सब रिफॉर्म से ऑटो बाजार के पुनरुद्धार होने की भी उम्मीद की जा रही है।