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#हिंदीहैंहम: एक सूखी नदी का रूप न ले ले हिंदी, इसके लिए जागने की जरूरत

Sun, 13 Sep 2020 08:53 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला के महत्वाकांक्षी हिंदी हैं हम अभियान में हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला कार्यालय शिमला से वेबिनार करवाया गया। इसमें समाज के बुद्धिजीवी वर्ग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अमर उजाला के इस कदम की सराहना करते हुए इन वक्ताओं ने हिंदी भाषा पर विचार रखे। पेश हैं इसके कुछ अंश... 

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भाषा का यह संकट बहुआयामी : संजय ठाकुर 
चर्चित उपन्यास 'सुबह-शाम की धूप' के लेखक संजय ठाकुर ने कहा कि वर्तमान समय की बात करें तो यह भाषा के परिवर्तन से भी बढ़कर भाषा के संकट का दौर है। भाषा का यह संकट बहुआयामी है। आज जहां एक ओर भाषा की वर्तनी प्रभावित हुई है, वहीं दूसरी ओर वाक्य-विन्यास की स्थिति भी बिगड़ी है। भाषा के सामान्य ज्ञान का भी नितांत अभाव दृष्टिगोचर होता है। इस संकट से पार पाने के लिए भाषा के उत्थान की दिशा में प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। अन्यथा यह प्रवाह एक दिन यूं ही थमकर सूखी नदी का रूप ले लेगा।

सरकारी कामकाज और बोलचाल की एक ही भाषा बने : डॉ. विजय
नौणी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. विजय सिंह ठाकुर ने कहा कि हिंदी को घर में बोले जाने की जरूरत है। आजकल की माताएं बच्चोंको हिंदी के शब्द सिखाने की कोशिश करती हैं। उनकी एक स्पर्धा होती है कि अंग्रेजी किसका बच्चा अच्छा बोलेगा। हमारा बहुभाषी होना बहुत जरूरी है। अगर व्यावहारिक संस्कृति बनानी है, तो हिंदी को मुश्किल शब्दों को छोड़ना होगा। 
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विज्ञान, तकनीक की भाषा बनने की यही चुनौती : डॉ. परमार 
‘दुनिया जैसी मैंने देखी’ पुस्तक के लेखक और जाने-माने उद्यान वैज्ञानिक डॉ. चिरंजीत सिंह परमार ने कहा कि जरूरत की हिंदी सब जानते हैं, विद्वानों की हिंदी अलग हो गई है। इराक में भी सब विज्ञान पुस्तकों को अरबी में अुनूदित करने के प्रयास हुए हैं, पर वहां कामयाबी ज्यादा नहीं रही। वह स्वीडन गए थे तो वहां स्वीडिश भाषा से लोग अंग्रेजी की ओर बदल गए। हिंदी के सामने भी विज्ञान और तकनीक की भाषा बनने की यही चुनौती है। 

सरकारों के साथ हमारी सजगता भी जरूरी : डॉ. राजेश 
शिक्षक एवं संस्कृत भाषा के जानकार वास्तुशास्त्र में पीएचडी डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि हिंदी राष्ट्र भाषा है। हिंदी पखवाड़े आयोजित किए जा रहे हैं। इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाए जाने की दिशा में प्रयास होने चाहिए। सरकारें इस पर ध्यान दे रही हैं, मगर हमें खुद भी इस बारे में सजग होने की जरूरत है। अमर उजाला का यह अभियान बहुत ही सराहनीय है। 

रंगमंच की हिंदी तराशने की जरूरत : केदार ठाकुर 
जाने-माने रंगकर्मी और अभिनेता केदार ठाकुर ने कहा कि नाटकों और रंगकर्म के माध्यम से भी यह भाषा संरक्षित होती रही है। आज के दौर में इस भाषा का स्वरूप बदलता नजर आता है। हिंदी के सामने आज अंग्रेजियत के प्रभाव में अपनी अस्मिता को बचाए रखने का संकट खड़ा है। सबकी जिम्मेवारी है कि इस दिशा में काम हो। हिंदी रंगमच को तराशने की जरूरत है। इसके लिए हिंदी भाषी रंगमंच को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। 

ऑनलाइन माध्यम से स्पर्धाएं अच्छी : रत्न सिंह 
शिक्षक रत्न सिंह वर्मा ने कहा कि देश ने प्रगति करनी है तो राष्ट्रभाषा हिंदी पर ध्यान देने की जरूरत है। सरकारी प्रश्रय तो हिंदी भाषा को चाहिए ही, मगर हमें खुद भी सजग रहने की जरूरत है। स्कूलों में हिंदी दिवस और हिंदी पखवाड़े के अवसर पर कई तरह की प्रतियोगिताएं करवाई जा रही हैं। यह ऑनलाइन माध्यम से स्पर्धाएं भी करवाई जा रही हैं। यह सही है। रत्न सिंह वर्मा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बगैण में प्रधानाचार्य हैं। 

हाथ की जगह हैंडू कहकर कौन सी भाषा सिखा रहे हम  : दिशा ठाकुर 
आकाशवाणी शिमला की उद्घोषिका दिशा ठाकुर ने कहा कि हिंदी तो हमारे दिल में बसी है तो इसे छोड़ने का तो मतलब पैदा नहीं होता है। पर बच्चों को स्कूल में भी केवल अंग्रेजी बोलने के लिए कहा जाता है और घर में भी अंग्रेजी बोलने के लिए कहा जाता है। अंग्रेजी सीखने में कोई हर्ज नहीं है, यह जरूरी है। पर बच्चों को हाथ की जगह हैंडू कहा जाता है तो यह कौन सी भाषा हुई। 

हमने हिंग्लिश बनाकर अनर्थ किया : तनुजा 
गुड़िया मामले में आंदोलन लड़ चुकीं समाज सेविका तनुजा थापटा ने कहा कि हमने हिंदी और अंग्रेजी का मिश्रण बनाकर हिंग्लिश भाषा बना दी है। न्यायालयों से लेकर अन्य कार्यालयों में शिकायतें अंग्रेजी में हो रही हैं। हिंदी दिवस पर एक कार्यक्रम कर हमें हिंदी के प्रति अपने कर्तव्यों को नहीं भूलना चाहिए। यह पखवाड़ों में ही खत्म न किए जाएं। हिंदी सेवियों और साहित्यकारों का दायित्व है कि वे ऐसा शब्दकोष बनाएं, जो सर्व स्वीकार्य हो। 

पीएचडी तक हिंदी में पढ़ाया जाए विज्ञान : अजय ठाकुर 
आइंस्टीन, न्यूटन और आर्किमिडीज के अनुसंधानों पर शोध प्रस्तुत कर चुके शिक्षक वैज्ञानिक अजय शर्मा ने कहा कि उन्हें अपने शोध पत्र पढ़ने के लिए कई मुल्कों में जाना पड़ा। रूस में लोग रूसी और जर्मन में जर्मनी में बात करते हैं। हमें विज्ञान की किताबों का हिंदी में अनुवाद करना होगा। हिंदी का विकास करना है तो पीएचडी तक विज्ञान का साहित्य हिंदी भाषा में लिखना होगा। 
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हमने अंग्रेज पैदा करने शुरू कर दिए : कश्यप 
कृषि अधिकारी और कवि देवी चंद कश्यप ने कहा कि अमर उजाला का यह हृदयस्पर्शी संवाद है। यह सत्य है कि आज हमने अंग्रेज पैदा करने शुरू कर दिए हैं। हमें कोर्ट, कचहरी और कान्वेंट स्कूलों में हिंदी को तरजीह दी जानी चाहिए। हिंदी पर इस तरह के संवाद उपयोगी हैं। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर इस तरह का संवाद बहुत अच्छा रहा है। 

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