कोरोना की पहली और दूसरी डोज लगवाने के बाद लोग अब उसी रफ्तार में बूस्टर डोज नहीं लगवा रहे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिला शिमला में अब तक महज 39,981 लोगों ने ही यह बूस्टर डोज लगवाई है।
स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों से केंद्रों पर टीकाकरण करवाने को कह रहा है लेकिन लोग कम संख्या में ही टीके लगवाने पहुंच रहे हैं। अमर उजाला के स्वास्थ्य अभियान के तहत बूस्टर डोज लगवाने के लिए शहर और गांवों की जानी-मानी हस्तियां लोगों को जागरूक कर रही हैं। यह हस्तियां व्हाट्सएप, फेसबुक के जरिये लोगों को बूस्टर डोज लगवाने की अपील कर रही हैं। जिले में अब तक 12 से 14 आयु वर्ग में 50694 बच्चों को वैक्सीन लग चुकी है। 15 साल से अधिक के 45,186 युवाओं को पहली और 36,757 को दूसरी डोज लग चुकी है। 18 से अधिक आयु वर्ग के 70,9,952 को पहली और 67,1347 को दूसरी डोज लग चुकी है।
सोशल मीडिया पर कर रहा हूं जागरूक : डॉ. रमेश
उपनिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. रमेश चंद ने बताया कि वह सोशल मीडिया के जरिये लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। लोग पहली और दूसरी डोज लगाकर बेफिक्र हो गए हैं। लेकिन अब बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। मास्क पहने और हाथों को पहले की तरह धोते रहें।
कोरोना के प्रति जागरूक होना जरूरी : सीमा
पेशे से एडवोकेट सीमा सूद एवं वाईडब्ल्यूसीए की सदस्य सिलाई सेंटर में काम सीखने आने वाली महिलाओं और बच्चियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करती हैं। डीडीयू अस्पताल में वह वीरवार को बूस्टर डोज लगवाने आई थीं। उन्होंने बताया कि वह अपने आस पड़ोस के लोगों को बूस्टर डोज लगवाने के लिए प्रेरित करती हैं।
टीकाकरण से न झिझकें, अपनों को करें सुरक्षित
हिमाचली लोक गायक विक्की चौहान ने कहा कि टीकाकरण से लोग झिझके नहीं बल्कि बेफिक्र होकर स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर टीके लगवाएं। इससे जहां वह खुद सुरक्षित होंगे वहीं समाज भी स्वस्थ रहेगा। दो सालों से यह बीमारी हमें खींचकर 2022 तक ले आई है। ऐसे में जिन्होंने दो डोज लगा दी हैं ऐसे में वह अब बूस्टर डोज लगाकर अपने आप को सुरक्षित करें।
बूस्टर डोज लगवाने की करेंगे अपील : तृप्ता
आर्ट ऑफ लिविंग संस्था की मीडिया प्रभारी तृप्ता शर्मा ने बताया कि कोरोना के टीकाकरण को लेकर उनकी संस्था ने स्कूलों में जाकर बच्चों को जागरूक किया है। मेडिटेशन और काउंसलिंग करके उन्हें टीकाकरण के प्रति प्रेरित किया। ऐसे में अब जो लोग दोनों टीके लगवाने के बाद बूस्टर डोज नहीं लगा पाए हैं, उन्हें जागरूक करने के लिए संस्था घरद्वार और ऑनलाइन माध्यम से जागरूक करने का काम शुरू करेंगी।