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Shimla News: आमलकी एकादशी व्रत आज, भगवान विष्णु की पूजा का है विशेष महत्व

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27 फरवरी को सुबह 12:34 बजे शुरू होगी तिथि, रात 10:33 बजे होगी समाप्त, आंवले की पेड़ की पूजा का भी प्रावधान
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28 फरवरी को सुबह 6:47 से सुबह 9:06 बजे के बीच होगा पारण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिंदू धर्म में रंगभरी एकादशी यानी आमलकी एकादशी व्रत का खास महत्व है। यह एकादशी काशी में रंगों के त्योहार की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का सबसे ज्यादा महत्व है। इस वर्ष आमलकी एकादशी व्रत की तिथि 27 फरवरी को सुबह 12:34 बजे शुरू होगी और रात 10:33 बजे समाप्त होगी। यह व्रत उदयाकालीन तिथि अनुसार 27 फरवरी को रखा जाएगा।

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली आमलकी एकादशी को अमला एकादशी या रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। काशी में इस दिन से होली के पर्व की शुरुआत होती है जिसकी वजह से इसे रंगभरी एकादशी कहा जाता है। गंज बाजार के राधा कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि रंगभरी एकादशी व्रत 27 फरवरी को और व्रत का पारण 28 फरवरी को सुबह 6:47 से सुबह 9:06 बजे के बीच होगा। उन्होंने कहा कि इस व्रत को सच्ची श्रद्धा से करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है। इसलिए इस दिन आंवले का पूजन और सेवन विशेष फल देता है।
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बन रहे यह शुभ संयोग
श्री राधा-कृष्ण मंदिर शिमला के पंडित उमेश चंद्र नौटियाल ने कहा कि इस बार आमलकी एकादशी पर कई शुभ योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग जैसे शुभ संयोग इस दिन को और भी खास बना रहे हैं। मान्यता है कि इन योगों में पूजा-पाठ और दान करने से कई गुना अधिक पुण्य मिलता है।
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