वहीं, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कोरोना वायरस को लेकर बनाए गए आईसोलेशन वार्ड में अव्यवस्था का माहौल है। अस्पताल के आठ बिस्तर वाले इस वार्ड में मेडिसिन वार्ड के मरीज भर्ती हैं। अस्पताल प्रशासन ने सिर्फ कोरोना वायरस के मरीजों के लिए आईसोलेशन वार्ड बनाने का दावा किया गया था। ऐसे में अब कोई संदिग्ध मरीज हिमाचल के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में आता है तो उसका इलाज क्या इन्हीं मरीजों के साथ होगा, यह सवाल उठने लगा है। अमर उजाला टीम ने अस्पताल के ई ब्लॉक स्थित आईसोलेशन वार्ड का दौरा किया।
यहां पाया गया कि वार्ड में करीब तीन से चार महिला मरीज दाखिल हैं। चिकित्सक मरीजों को उपचार दे रहे हैं जबकि नियमों के मुताबिक इस वार्ड को सिर्फ कोरोना वायरस की चपेट में आए मरीजों के लिए ही सिर्फ इंतजाम होने चाहिए। हालांकि इस वार्ड के साथ आईसीयू में वेंटिलेटर की सुविधा है, जहां तीन वेंटिलेटर के अलावा इधर से उधर आवाजाही करने वाला एक वेंटिलेटर है। चंडीगढ़ के मोहाली में भी संदिग्ध मरीज के सामने आने के बाद से हड़कंप मचा हुआ है। ऐसे में अगर बाहरी देशों से आया मरीज हिमाचल में पाया जाता है तो अस्पताल प्रबंधन के अधूरे इंतजाम के कारण बाकी के मरीजों की समस्या बढ़ सकती है।
बीमारी का पता लगते ही करेंगे दाखिल
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनकराज ने बताया कि अगर बाहरी देश से हिमाचल आए किसी मरीज में यह वायरस पाया जाता है तो जांच के बाद तुरंत उसे आईसोलेशन वार्ड में दाखिल किया जाएगा। कहा कि अगर ऐसा मरीज नहीं आता है तो बाकी के मरीजों को सामान्य तौर पर यहां पर रूटीन की तरह उपचार दिया जाएगा।