प्रदेश के एकमात्र युद्ध संग्रहालय धर्मशाला में भारतीय वायुसेना के विजयंता टैंक को स्थापित किया जाएगा। इसके लिए प्लेटफार्म और संयुक्त भव्य गेट बनाया जाएगा। उपायुक्त कांगड़ा राकेश प्रजापति ने शहीद स्मारक और युद्ध संग्रहालय के निर्माण कार्यों को लेकर समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। उपायुक्त ने कहा कि युद्ध संग्रहालय के कार्यों को भी गति प्रदान की जाएगी।
युद्ध संग्रहालय में सेना और नेवी से संबंधित सामग्री प्रदर्शित करने के लिए जबलपुर स्थित नेवी हेडक्वार्टर के लिए वाहन रवाना कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि संग्रहालय को अनूठा स्वरूप देने के लिए सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों, विशेषज्ञों एवं अन्य लोगों का सहयोग लिया जा रहा है। इसके लिए एक कोर कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों, सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों और संग्रहालय निर्माण का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि युद्ध संग्रहालय सेना के युद्धों और संघर्षों की शिक्षा एवं देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक महत्व से जुड़ी चीजों के संग्रह, संरक्षण, व्याख्या और सैन्य साजोसामान की प्रदर्शनी करने वाला संस्थान होगा। उन्होंने कहा कि युद्ध संग्रहालय में जनरल जोरावर सिंह की प्रतिमा, 21 परमवीर चक्र विजेताओं की प्रतिमाएं, हिमाचल के विक्टोरिया क्रॉस, परमवीर चक्र, अशोक चक्र विजेताओं की प्रतिमाएं, सशस्त्र सेनाओं के झंडों को प्रदर्शित किया जा चुका है। भारतीय वायुसेना से प्राप्त एचपी टी-32 को भी स्थापित किया गया है।
इसके अलावा हिमाचली सैनिकों की तैनाती वाली रेजिमेंट्स के एनक्लोजर भी म्यूजियम में स्थापित किए जाएंगे। इस युद्ध स्मारक में विभिन्न युद्धों को दर्शाया जाएगा। उन्होंने कहा कि युद्ध संग्रहालय में सेना से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं की ऑडियो-वीडियो के माध्यम से प्रदर्शन की भी सुविधा रहेगी।
इसे एक ऐसी जगह के तौर पर विकसित किया जा रहा है जहां लोग सैनिकों और राष्ट्र की सुरक्षा में किए गए उनके असाधारण प्रयासों के प्रति सम्मान व्यक्त करेंगे। उपायुक्त ने युद्ध संग्रहालय के निर्माण कार्यों से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय में कार्यों को पूरा करें। इस अवसर पर ब्रिगेडियर पाठक, कर्नल पुन, कर्नल डढवाल, कर्नल गणेश, संजय भारद्वाज आदि उपस्थित रहे।