ऐसे किया जाता है अध्ययन
स्लीप लैब एक ऐसी सुविधा है, जहां नींद संबंधी विकारों के निदान और उपचार के लिए नींद का अध्ययन किया जाता है।जिसे पॉलीसोमोग्राफी (पीएसजी) भी कहा जाता है। नींद के अध्ययन के दौरान रोगी रात प्रयोगशाला में रहता है, जबकि एक तकनीशियन उसके मस्तिष्क और शरीर की गतिविधि पर नजर रखता है। मस्तिष्क तरंगों, हृदय गति, श्वास, मांसपेशियों की गतिविधि पर नजर रखने के लिए मरीज के शरीर पर छोटे सेंसर लगाए जाते हैं। रक्त में ऑक्सीजन के स्तर की निगरानी के लिए मरीज की उंगली या कान पर एक सेंसर भी लगाया जाता है।
खर्राटों, अंगों की गति पर नजर रखता है तकनीशियन
कम रोशनी वाले वीडियो कैमरा, ऑडियो सिस्टम से तकनीशियन को कमरे में हो रही गतिविधियों को देखने और सुनने की सुविधा मिलती है। तकनीशियन रोगी की मस्तिष्क तरंगों,आंखों की गति,हृदय गति,सांस लेने के तरीके,रक्त ऑक्सीजन के स्तर, शरीर की स्थिति, छाती और पेट की गति,अंगों की गति, खर्राटों और अन्य शोर पर नजर रखता है। नींद संबंधी विकार स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। इससे अवसाद, मधुमेह, हृदय रोग जैसी गंभीर स्थितियों का खतरा बढ़ जाता है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं। शुरू में ही इनका निदान और उपचार व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है।
ऐसे मिलती है सुविधा
कम रोशनी वाले वीडियो कैमरा, ऑडियो सिस्टम से तकनीशियन को कमरे में हो रही गतिविधियों को देखने और सुनने की सुविधा मिलती है। तकनीशियन रोगी की मस्तिष्क तरंगों,आंखों की गति,हृदय गति,सांस लेने के तरीके,रक्त ऑक्सीजन के स्तर, शरीर की स्थिति, छाती और पेट की गति,अंगों की गति, खर्राटों और अन्य शोर पर नजर रखता है। नींद संबंधी विकार स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। इससे अवसाद, मधुमेह, हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता हैं। शुरू में ही इनका निदान और उपचार व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है।
ऐसे किया जाता है अध्ययन
स्लीप लैब में रोगी रात को प्रयोगशाला में रहता है, जबकि एक तकनीशियन उसके मस्तिष्क और शरीर की गतिविधि पर नजर रखता है। मस्तिष्क तरंगों, हृदय गति, श्वास, मांसपेशियों की गतिविधि पर नजर रखने के लिए मरीज के शरीर पर छोटे सेंसर लगाए जाते हैं। रक्त में ऑक्सीजन के स्तर की निगरानी के लिए मरीज की उंगली या कान पर एक सेंसर भी लगाया जाता है।है और कई युद्धों के नतीजे तय किए हैं।
लेकिन एम्स प्रबंधन के अनुसार अंडर ट्रायल पिछले सप्ताह ही ड्रोन से धर्मपुर सैंपल भेजे गए थे। एम्स के पीआरओ डॉक्टर तरुण ने बताया कि एक पायलट एम्स से ड्रोन उड़ाता है, वहीं दूसरा व्यक्ति धर्मपुर पोस्ट ऑफिस के पास सैंपल उतारने और उन्हें धर्मपुर लैब पहुंचा रहा है। इन सैंपल को सामान्य तौर पर कोल्ड चेन में भेजा जाता है। लेकिन ड्रोन की कैपेसिटी पांच किलो की है तो उसमें कोल्ड चेन में सैंपल भेजना संभव नहीं है। इसलिए थर्माकोल का बॉक्स बनाकर उसमें आइस पैक रखकर उसके अंदर इन सैंपल पैक कर भेज रहा है।