भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में आहिल्याबाई की 300वीं जयंती पर व्याख्यान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), शिमला में अहिल्याबाई होलकर महिला सशक्तिकरण की सार्वभौमिक प्रतीक विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती वर्ष पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। लोकमाता अहिल्याबाई त्रिशताब्दी समारोह समिति के की अध्यक्ष और प्रो. चंद्रकला पाडिया ने विश्लेषण प्रस्तुत किया।
प्रो. पाडिया ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर भारतीय संस्कृति, राजनीति और समाज की त्रैमासिक चेतना की मूर्त अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने एक नारी होकर उस युग में सत्ता संभाली जब नारी को सार्वजनिक जीवन में स्थान तक नहीं था। उन्होंने बताया कि राजमाता की शासन व्यवस्था मात्र प्रशासनिक दक्षता का नमूना नहीं थी, बल्कि वह धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक समरसता और लोक कल्याण का आदर्श रूप थी। उनका कार्यकाल स्त्री नेतृत्व की नैतिक शक्ति का प्रतीक बन गया।
प्रो. पाडिया ने कहा अहिल्याबाई न केवल मध्य भारत में मालवा की समृद्धि की आधारशिला बनीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष में मंदिरों, धर्मशालाओं, कुओं, घाटों और शिक्षण संस्थानों के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कर धार्मिक स्वाभिमान की पुनर्स्थापना की और रामेश्वरम से सोमनाथ तक धार्मिक स्थलों का संरक्षण कर भारत की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ किया।
प्रो. शैलेन्द्र राज मेहता ने इस विमर्श की आवश्यकता को रेखांकित किया। प्रो. शशिप्रभा कुमार ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर का जीवन चरित्र कर्तव्यपरायणता, धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की त्रिवेणी है। इस व्याख्यान का संचालन संस्थान के जन संपर्क अधिकारी अखिलेश पाठक ने किया।