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विशेषज्ञ की सलाह: मटर में विल्ट की रोकथाम के लिए बीज को करें उपचारित

Tue, 12 Nov 2019 10:32 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन
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हिमाचल भर के विभिन्न जिलों में लहसुन सहित मटर की बिजाई की जाती है। इसमें कई प्रकार की बीमारी भी लग जाती है। जिसके लिए नौणी विवि ने किसानों को लहसुन की निराई-गुड़ाई और हल्की सिंचाई करने की सलाह दी है। नौणी विवि के पर्यावरण विभाग अध्यक्ष डॉ. सतीश भारद्वाज ने कहा कि पालक, मूली और शलगम आदि की बिजाई पूरी कर इसमें खाद डालें। इसके अलावा मटर में विल्ट की रोकथाम के लिए बीज की बीजाई से पूर्व बाविस्टिन 0.5 ग्राम लीटर पानी में 2 घंटे उपचारित करने के बाद बीजाई करें।

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प्याज की तैयार पनीरी को खेत में रोपाई करें। इसके अलावा सेब व अन्य शर्द कालीन फल पौधों के रोपण के लिए गडढ़ा तैयार करके उसमें सड़ी गोबर खाद 500 ग्राम सुपर फास्फेट 50 मिली मासबन प्रति लीटर पानी प्रति गड्ढे  में डालें। पौधों
के तौलियों में नमी को संरक्षित करने के लिए घास की मोटी तह के रुप में मल्च बिछाएं। शीतोष्ण फलों की पौधशाला में समय-समय पर सिंचाई करें। गड्ढों की खुदाई का कार्य पूरा करने के बाद गड्ढों को भरना शुरू कर दें। 

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वानिकी संबंधित कार्य

नए रोपित पौधों से खरपतवार निकालें और जंगली जानवरों से बचाएं। समय-समय पर पौधों का निरीक्षण करते रहें और सिंचाई करें। देवदार, सूजी, रई, तोष, खिड़क, हरड़, बहेड़ा, आंवला, अखरोट आदि के बीज एकत्रित करके सुखायें।

वहीं नवजात बछड़ों और बछडिय़ों को 3-4 सप्ताह की आयु में पेट के कीड़ों के लिए फैंटस प्लस गोली 1 गोली/10 किलोग्राम व गैर गर्भवती वयस्क पशु को पेट के कीड़ों के लिए अलबंडाजोल 7.5 मिलीग्राम/किलोग्राम व गर्भवती पशु को पेट के कीड़ों के लिए फेन्बेन्डाजोजल 5-7.5 मिलीग्राम/किलोग्राम
शरीर भार के अनुसार दें।
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अक्तूबर माह में लगाई जाने वाली गोभी की फसलों में तेले की रोकथाम के लिए क्या करना चाहिए ?

सवाल-अक्तूबर माह में लगाई जाने वाली गोभी की फसलों में तेले की रोकथाम के लिए क्या करना चाहिए ? चैनसिंह निवासी धरोट जिला सोलन।

जवाब -अक्तूबर माह में लगाई गई गोभी वर्गीय सब्जियां जैसे फूलगोभी, बंदगोभी, ब्रोकली आदि में नत्रजन खाद 10 किग्रा पर बीघा की दर से डालें और निराई गुड़ाई करें। इसके अलावा तेले की रोकथाम के लिए मिथाईल डेमेटान मैटासिस्टॉक्स 10 मिली 10 लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें।

सवाल- भारी बारिश, तुफान और फलों की तुड़ाई के बाद टूटी हुई टहनियों क्या करना चाहिए, यदि इन्हे निकाला जाएगा तो किस तरह से निकालना चाहिए। 
राम प्रकाश भारद्वाज निवासी चायल जिला सोलन। 

जवाब- फल पौधों में फल तुड़ान के पश्चात टूटी हुई टहनियों को काट कर निकाल देना चाहिए। जिसमें कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

वहीं पौधों के तनों को सूर्य की किरणें से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए तने पर चूने का लेप करें। लेप सामाग्री तैयार करने के लिए 100 लीटर पानी में 30 किलों चूना, 500 ग्राम नीला थोथा और 500 मिली अलसी का तेल मिलाएं।
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