शिमला। नगर निगम कार्यालय में शनिवार को ठेकेदारों ने जमकर हंगामा किया। सुबह से टेंडर खुलने का इंतजार कर रहे ठेकेदार शाम तक टेंडर न मिलने पर भड़क गए। इन्होंने अफसरों पर पार्षदों के साथ मिलीभगत कर चहेतों को ही काम देने के आरोप जड़ दिए।
निगम प्रशासन ने करीब 35 लाख रुपये की लागत वाले 17 कार्यों के टेंडर कॉल किए थे। इनमें सड़क, रास्ते की मरम्मत, डंगे आदि के काम शामिल हैं। ठेकेदारों को शुक्रवार को टेंडर फार्म जारी किए। इन्हें कहा गया कि शनिवार दोपहर तीन बजे टेंडर खोले जाएंगे। ठेकेदार सुबह से ही निगम दफ्तर में डट गए। लेकिन तीन बजे बताया गया कि अब टेंडर चार बजे खुलेंगे। फिर चार बजे भी टेंडर नहीं खुले। ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनसे कहा कि अब टेंडर रद्द कर दिए हैं। इस पर ठेकेदार भड़क गए और आरोप लगाया कि ज्यादा आवेदनों के कारण टेंडर रद्द किए हैं। ठेकेदार यूनियन के चेयरमैन मनोज चौहान और प्रधान पीएन शर्मा ने अधिकारियों पर कई पार्षदों के चहेतों को काम देने के भी आरोप लगा दिए। कहा कि पहले दो महीने तक ठेकेदार काम नहीं ले रहे थे, अब काम लेने आए तो टेंडर रद्द कर दिए।
ठेकेदारों ने दी कोर्ट जाने की धमकी
टेंडर कैंसिल होने के बाद कई ठेकेदार वापस घर लौट गए। इन्हें बाद में निगम दफ्तर से फोन कर बताया गया कि अब टेंडर सोमवार सुबह खुलेंगे। ठेकेदार फिर फार्म भर सकते हैं। ठेकेदार ईश्वर चंदेल ने कहा कि निगम के खिलाफ वह कोर्ट जाएंगे। टेंडर देने में मनमानी हो रही है।
सोमवार सुबह खुलेंगे टेंडर
नगर निगम के अधिशासी अभियंता सुधीर गुप्ता ने कहा कि अभी कोई टेंडर रद्द नहीं किए हैं। टेंडर खुलने में देरी हुई है, इसे अब सोमवार सुबह खोलेंगे। इस बारे में ठेकेदारों को भी बता दिया है। चहेतों को टेंडर देने के आरोप गलत हैं।