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सड़न रोग से मटर की 30 फीसदी फसल बर्बाद

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- फोटो : अमर उजाला
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शिमला। जिले में लहलहाती हरे मटर की फसल सड़न रोग की चपेट में आ गई है। दो-तीन दिन से लगातार हो रही बारिश से मटर को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे मटर के पौधे सड़ने लगे हैं। किसान हालांकि फसल को बचाने के लिए कीटनाशक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन राहत नहीं मिल रही।
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बरसात के कारण मटर की करीब 30 प्रतिशत खेती नष्ट हो गई है। बरसात ऐसे ही जारी रही तो आने वाले दिनों में नुकसान और हो सकता है।

सड़न रोग से मटर की खेती नष्ट होने की कगार पर है। मटर की फसल में सबसे ज्यादा रोग भारी बरसात के कारण लगते हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक मटर की फसल में गोबर की सही मात्रा न मिलने से सड़न रोग का खतरा ज्यादा रहता है। बरसात में यह रोग और ज्यादा सक्रिय हो जाता है। बरसाती मटर में चित्री रोग लगने का भी खतरा रहता है। विशेषज्ञ ने किसानों को सलाह दी है कि वह खेतों में पानी खड़ा न होने दें।
ऐसे फैलता है सड़न रोग
मटर में सड़न रोग पौधे के तने से शुरू होता है। सड़न रोग में तना पहले पीला पड़ता है और फिर पूरे पौधे को अपनी चपेट में ले लेता है। मटर का सड़न रोग हवा और पानी से फैलता है। बारिश में यह रोग ज्यादा सक्रिय होता है और पानी के बहाव से पूरे खेत में फैल जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह रोग मिट्टी के साथ लगे पत्ते से शुरू होता है और धीरे-धीरे जड़ों तक चला जाता है। इससे पौधा पीले रंग में बदल जाता और फिर सड़ जाता है।
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खेतों से करें बरसात के पानी की निकासी
जिला कृषि अधिकारी मोहेंद्र सिंह भवानी के मुताबिक सड़न रोग को दूर करने के लिए खेतों में हल्के कीटनाशक का छिड़काव करें। खेतों से बरसात के पानी को निकालने के लिए निकास नालियां जरूर बनाएं। इससे खेतों में पानी नहीं रुकेगा और फसल बर्बाद होने से बची रहेगी। मटर की फसल को सड़न रोग से बचाने के लिए हल्के कीटनाशक का छिड़काव करें। मौसम साफ होने पर कीटनाशक का सही असर होता है और सड़न रोग जड़ से खत्म हो जाता है। बरसात में किए गए छिड़काव के कारण पौधे के सूखने का डर रहता है।
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