जिला परिषद की कमान थामने की रस्साकशी में हमीरपुर और मंडी फतह करने के बाद भाजपा की नजर अब अन्य जिलों पर है। मंडी के बाद कांगड़ा में समीकरण जोड़कर सीएम जयराम ठाकुर ने शिमला लौटते ही सरकारी निवास ओकओवर में सोलन जिला परिषद के सदस्य बुला लिए। अधिकतर जिलों में सरदारी अपने हाथ में लेकर सत्तारूढ़ भाजपा अपने वर्चस्व का संदेश देना चाह रही है।
आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति की बुनियाद इन जिला परिषदों में भाजपा चूकना नहीं चाह रही है। हमीरपुर में कांग्रेस समर्थित पार्षद को अपने पक्ष में कर भाजपा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाने में कामयाब रही। अपने गृह जिला मंडी में खुद जाकर मुख्यमंत्री ने भाजपा के ही बागी को परिषद का अध्यक्ष बनाकर सरदारी पार्टी के पक्ष में की।
सीएम शुक्रवार को सबसे बड़ी जिला परिषद कांगड़ा में भी भाजपा की पकड़ दुरुस्त करवाने गए। शाम को शिमला लौटकर सोलन के पार्षद ओकओवर बुलाए। कांगड़ा में 54 में से भाजपा समर्थित 26 पार्षद हैं। 19 कांग्रेस विचारधारा और 9 निर्दलीय हैं। पिछली बार यहां कांग्रेस का बहुमत था, लेकिन क्रॉस वोटिंग से अध्यक्ष भाजपा का बन गया था। सोलन में कुल 17 सीटों में से सात भाजपा, तीन कांग्रेस और सात निर्दलियों के पास हैं। भाजपा के दो बागी मनाए जा रहे हैं। चंबा जिले में 18 में से 10 भाजपा, कांग्रेस छह, दो निर्दलीय हैं। बिलासपुर में 14 सीटों में से भाजपा की छह, कांग्रेस की तीन सीटें और पांच निर्दलीय हैं। कांग्रेस से संबद्ध चार और पार्षद भी जीतकर आए हैं।
कुल्लू में निर्दलीय के हाथ में खेल
कुल्लू में 14 सीटों पर निर्दलीय के हाथ में सारा खेल है। भाजपा की 5, कांग्रेस और निर्दलीय की 4-4 और एक वामपंथी सीट है। यहां भाजपा के तीन बागी चुनाव जीतकर आए हैं।
सिरमौर में आठ भाजपा और आठ कांग्रेस के पार्षद
सिरमौर में आठ भाजपा और आठ कांग्रेस समर्थित पार्षद हैं, जबकि एक निर्दलीय जीतकर आया है। निर्दलीय का पाला कांग्रेस की ओर ज्यादा है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप को घर में झटका देकर कांग्रेस सरदारी हथियाना चाहती है।
शिमला में कांग्रेस का पलड़ा भारी
शिमला जिले में कांग्रेस अपने पाले में 27 में से 13 सीटें होने का दावा कर रही है। भाजपा के पास यहां 4 सीटें, निर्दलीय 5 और 2 वामपंथी हैं।