झड़ग में 54 साल बाद शांत महायज्ञ
- फोटो : अमर उजाला
सुरक्षा व्यवस्था रही मजबूत
महायज्ञ के दौरान वाहनों की अधिक आवाजाही के चलते सुबह से शाम तक मंदिर स्थल से लेकर गांव की हर जगह पुलिस के जवान तैनात रहे। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को देखने के लिए अलग से अधिकारी नियुक्त किए हैं। झड़ग पंचायत के प्रधान अशोक सारटा ने इस सहयोग के लिए सभी विभागों के अधिकारियों और मेहमानों का आभार वक्त किया।
झड़ग में 54 साल बाद शांत महायज्ञ
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शांत अनुष्ठान में सभी घरों को दिवाली की तरह सजाया
करीब सात गांव की ओर से आयोजित किए जा रहे शांत अनुष्ठान में सभी घरों को दिवाली की तरह सजाया गया गया है। घरों के बाहर मेहमानों के लिए लंगर की व्यवस्था की गई है। देवताओं के साथ पहुंचे खूंदों के लिए उनके तंबुओं में भोजन की व्यवस्था है। खूंदों की लिए खानपान के सामान की व्यवस्था मंदिर की ओर से की गई है, लेकिन सभी खूंद भोजन अपने लिए स्वयं तैयार करते हैं। झड़ग गांव में मंदिर के आसपास खूंद दो रात तंबुओं में गुजारेंगे।
झड़ग में 54 साल बाद शांत महायज्ञ
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मंदिर के प्रमुख राय लाल मेहता ने बताया कि इस बार अनुष्ठान को पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढि़यों को समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचय मिल सके। महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए और देवताओं के जयकारों, ढोल-नगाड़े, रणसिंगे, करनाल की धुनें गूंजती रहीं। पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने लंबे अंतराल के बाद धार्मिक अनुष्ठान हो रहा है।
झड़ग में 54 साल बाद शांत महायज्ञ
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यह अनुष्ठान आस्था को मजबूत करने के साथ लोगों को एक सूत्र में बांधने का कार्य कर रहा है। कार्यक्रम के समापन पर शनिवार को देवता नागेश्वर के आशीर्वाद के साथ सामूहिक कल्याण और वर्षभर की सुख-समृद्धि की कामना की गई।