हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में गुड़िया दुराचार और हत्या मामले की सुनवाई के बाद जैसे ही सीबीआई के अधिकारी बाहर निकले तो परिसर में अजब-गजब स्थिति पैदा हो गई।
गुड़िया के लिए इंसाफ मांग रहे युवा आंदोलनकारियों ने मदद सेवा ट्रस्ट के सदस्य विकास थापटा के नेतृत्व में सीबीआई अफसरों का पीछा किया तो वे एक होटल में नजरबंद हो गए। बाहर से पुलिसवालों का कड़ा पहरा रहा।
गुस्साए युवा सीबीआई से सवाल कर रहे थे कि गुड़िया के कातिलों का पता लग गया है तो जनता को इसकी जानकारी देने में क्या हर्ज है। अधिकारियों ने जैसे-तैसे बीच-बचाव करते हुए आंदोलनकारियों को सीबीआई कार्यालय बुलाया। शाम को एक अधिकारी से मुलाकात के बाद ये आंदोलनकारी कुछ आश्वस्त हुए।
चिल्ला-चिल्लाकर की सवालों की बौछारें
सुनवाई खत्म होने के बाद आंदोलनकारियों ने सीबीआई की एसआईटी के प्रमुख एसएस गुरुम और अन्य अधिकारियों का हाईकोर्ट परिसर में ही घेराव किया। अधिकारी बगैर जवाब दिए गेट से बाहर की ओर भागते हुए निकले तो गुस्साए युवाओं ने चिल्ला-चिल्लाकर सवालों की बौछारें करते हुए उनका माल रोड पर भी पीछा किया।
इंदिरा गांधी खेल परिसर और एमएलए होस्टल के बीच वाली सड़क के पास एक होटल में एक अधिकारी भीतर घुसे। बाहर से पुलिसकर्मियों का कड़ा पहरा रहा। काफी वक्त तक ये अधिकारी इसी होटल में नजरबंद ही रहे।
आंदोलनकारियों ने की नारेबाजी
इसी बीच होटल के बाहर आंदोलनकारियों ने गुड़िया को न्याय दिलाने के लिए नारेबाजी की। चाय पीने के बाद ये अधिकारी होटल के दूसरे रास्ते से आंदोलनकारी युवाओं से बीच-बचाव करते हुए जाने लगे।
इन युवाओं की नजर पड़ी तो ये दूसरी ओर सीबीआई अफ सरों के पीछे भागकर फिर उनसे यही सवाल करने लगे। इसी बीच सीबीआई के एसपी एसएस गुरुम ने इन युवाओं को कहा कि वे शाम को छह बजे सीबीआई कार्यालय में आएं। वहां उनसे बात की जाएगी।
आंदोलनकारियों ने पूछे तीखे सवाल
शाम के वक्त मदद सेवा ट्रस्ट की अध्यक्षा तनुजा थापटा और अन्य आंदोलनकारी सीबीआई कार्यालय गए। वहां उनसे एसपी एसएस गुरुम तो नहीं मिले। उनसे सीबीआई के एक डीएसपी ने मुलाकात की।
तनुजा थापटा ने बताया कि उन्हें आश्वस्त किया गया है कि इस मामले में सीबीआई के पास लीड है। जल्दी ही जनता को भी सब बातों का पता चल जाएगा। अन्य आंदोलनकारियों में डीके नेगी, हिमांशु कुमरा, तेजराम, सुशांत वर्मा आदि ने सीबीआई के अधिकारियों का घेराव कर उनसे तीखे सवाल करते रहे।