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उपलब्धि : एनआईटी के छात्र के स्वचालित ऑक्सीजन सिलिंडर ट्रॉली का पेटेंट मंजूर

Sun, 11 Feb 2024 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर

सार

एनआईटी हमीरपुर के इलेक्ट्रिकल विभाग के छात्र रजत अनंत ने अपने इंजीनियर भाई मोहित के साथ मिलकर साल 2021 में स्वचालित ऑक्सीजन सिलिंडर ट्रॉली का प्रोटोटाइप तैयार किया था। 
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स्वचालित ऑक्सीजन सिलिंडर ट्रॉली - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अस्पतालों में अब ऑक्सीजन सिलिंडर ढोने की जरूरत नहीं रहेगी। एनआईटी हमीरपुर के इलेक्ट्रिकल विभाग के छात्र रजत अनंत ने अपने इंजीनियर भाई मोहित के साथ मिलकर साल 2021 में स्वचालित ऑक्सीजन सिलिंडर ट्रॉली का प्रोटोटाइप तैयार किया था। अब इस प्रोटोटाइप के विकसित मॉडल को पेटेंट कार्यालय से मंजूरी मिली है। इस आधुनिक ट्राॅली को आईओटू नाम दिया गया है। इस प्रोटोटाइप को रजत ने इलेक्ट्रिकल विभाग के प्रो. आरके जरियाल व मेकेनिकल विभाग के प्रो. राजेश शर्मा और आरके सूद के मार्गदर्शन में विकसित किया। रजत साल 2022 में एनआईटी से बीटेक कर पासआउट हो गए हैं। साल 2021 में इस प्रोटोटाइप को बनाया गया है। उस वक्त जिला प्रशासन हमीरपुर ने इस कार्य में सहयोग किया था।

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तत्कालीन डीसी देव श्वेता बनिक ने इस प्रोजेक्ट को जिला प्रशासन के माध्यम से फंड किया था। प्रोटोटाइप को विकसित करने के बाद इसका इस्तेमाल मेडिकल कॉलेज हमीरपुर और सिविल अस्पताल टौणीदेवी में सफलतापूर्वक किया गया। इस प्रोटोटाइप को एनआईटी के प्रोफेसर के मार्गदर्शन में रजत अनंत ने विकसित किया। इस प्रोटोटाइप के पेटेंट को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय में मंजूरी के लिए भेजा गया था। विकसित प्रोटोटाइप में कई फीचर दिए गए हैं। शुरुआती चरण में विकसित किए गए प्रोटोटाइप में कई कमियां थीं, जिन्हें अब पूरा किया गया है। अब इस स्वचालित ट्राॅली में ब्रेक, रिवर्स, बैटरी सूचक के फीचर भी जोड़े गए हैं।

भारी भरकम सिलिंडर उठाने से छुटकारा
अस्पतालों में हाथों के माध्यम से चलाई जाने वाली ट्राॅली से भारी भरकम ऑक्सीजन सिलिंडर को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना बेहद कठिन होता है। मेडिकल स्टाफ को इसके लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। बिजली से चलने वाली आधुनिक ट्रॉली में आसानी से चार से छह सिलिंडर को महिला व पुरुष स्टाफ एक से दूसरे जगह ले जा सकते हैं। इस ट्रॉली को आसानी से चलाया जा सकता है।
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स्टार्टअप योजना से प्रोजेक्ट को जोड़ने की योजना
प्रो. आरके जरियाल ने कहा कि इस प्रोटोटाइप के पेटेंट को मंजूरी मिलना बड़ी सफलता है। इस प्रोटोटाइप का सफलतापूर्वक इस्तेमाल हमीरपुर के दो अस्पतालों में किया गया है। अब पेटेंट को मंजूरी मिलने के बाद स्टार्टअप शुरू किया जाएगा। छात्र इस उपलब्धि के बधाई के पात्र हैं। अब इस प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश उद्योग विभाग को स्टार्टअप योजना के लिए आवेदन दिया जाएगा।

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