हिमाचल में एयरक्रैश की तर्ज पर हादसे हो रहे हैं और राज्य में अब तक रहीं सरकारें इनसे सबक नहीं ले रही हैं। प्रदेश में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों व्यक्तिगत आरोपों में व्यस्त हैं। इनके लिए परिवहन, सड़क जैसे अहम मुद्दे गौण हो गए हैं। वाहनों और सड़कों की बदहाली राज्य में हादसों का बड़ा कारण बन गई है।
सड़कों के किनारे न तो क्रैश बैरियर लगे हैं और न ही ब्लैक स्पॉट ही दुरुस्त किए जा रहे हैं। हिमाचल में सड़क हादसों में हर साल चार सौ से पांच सौ लोगों तक की मौत हो रही है। करीब ढाई हजार से अधिक सड़क हादसे हो रहे हैं। प्रदेश की सर्पीली सड़कों पर हादसों का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
लोक निर्माण और पुलिस महकमा सीएम के पास है, जबकि परिवहन विभाग परिवहन मंत्री देखते हैं। इन महकमों में तालमेल न बन पाना भी हादसों का एक कारण है। राज्य का लोक निर्माण विभाग तमाम सड़कों को ऐसे नहीं बना पाया है, जिससे हादसों को रोका जा सके। पुलिस विभाग की पेट्रोलिंग भी केवल शहरों में ही नजर आती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों पर लापरवाही से वाहनों के चलाए जाने पर कोई चालान नहीं कटते। यही हाल, परिवहन महकमे का है। परिवहन अधिकारी भी बसों की निगरानी करने, ओवरलोडिंग को रोकने और चालकों-परिचालकों की लापरवाही पर अंकुश लगा पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस महासचिव एवं मीडिया विभाग के अध्यक्ष नरेश चौहान ने कहा कि ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जा रहे हैं। क्रैश बैरियर लगाए जा रहे हैं। कई बार चालकों की लापरवाही से भी हादसे हो रहे हैं। इस बारे में गंभीर कानून बनाने की जरूरत है।
जिस तरह से जानें जा रही हैं, वह चिंता का विषय है। कहा कि रामपुर का हादसा दुर्भाग्यपूर्ण है। सड़कों प्रशिक्षित चालक होने चाहिए, ओवरलोडिंग कम होनी चाहिए और औचक निरीक्षण होने चाहिए। कांग्रेस सरकार इस विषय में गंभीरता बरत रही है। कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
कांग्रेस सरकार में धूमल सरकार की तुलना में ज्यादा हादसे: डा. बिंदल
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता डा. राजीव बिंदल ने कहा कि सड़कों की स्थिति में भाजपा की सरकार में बहुत सुधार हुआ। कांग्रेस सरकार से तुलना करें तो धूमल सरकार में हादसे भी कम हुए। यह बहुत ही दुखदायी पहलू है।
सड़क के ब्लैक स्पॉट ठीक करने के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी हिमाचल सरकार को आश्वस्त किया, मगर उचित कदम नहीं उठा पाए। चालकों को ज्यादा काम करना पड़ता है। उससे ये स्थिति खराब हो रही है। मैकेनिकल फाल्ट भी ज्यादा है। रामपुर की घटना दुखद है।