शिमला। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की विवि इकाई ने विवि से किए गए नौ कार्यकर्ताओं के निष्कासन को तुरंत वापस लेने की मांग को लेकर कैंपस में जमीन पर शव के रूप में लेट कर विरोध किया। छात्र संगठन नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय की नाकामी की वजह से मेधावी रहे छात्र छात्राएं पीजी कोर्स में प्रवेश पाने से वंचित रह गए। इकाई सचिव अंकित चंदेल ने कहा कि विवि प्रशासन भले ही यूजी छठे सेमेस्टर के सभी परीक्षा परिणाम सेटल कर घोषित करने का दावा कर रहा है, लेकिन शनिवार को भी विवि में ऐसे छात्र-छात्राएं भटकते रहे जिनका पांचवें सेमेस्टर के 503 गणित की परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं हुआ है। एक साथ पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा में हजारों छात्र-छात्राओं के फेल होने का मामला सामने आने पर अभी तक विवि ने कोई पुनर्मूल्यांकन नहीं करवाया। वहीं, 2015 बैच के चौथे सेमेस्टर की रि-अपीयर और छठे सेमेस्टर के अधूरे घोषित परिणाम के कारण तीन हजार से अधिक ऐसे छात्र हैं, जो पीजी में प्रवेश हीं नहीं ले पाए हैं। अंकित ने चेताया है कि यदि जल्द निष्कासन का फैसला वापस न लिया गया और अधूरे परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किए गए तो एबीवीपी आंदोलन को और उग्र करेगी। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने पुस्तकालय के समक्ष एकत्र हो कर विवि प्रशासन और कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने सफेद चादर ओड़ कर छात्रों के भविष्य को लाश के रूप में दिखाया। एबीवीपी नेताओं ने कहा कि जिस तरह 1975 में आपातकाल जैसे हालात बने थे, ठीक उसी तरह से कैंपस में माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विवि में भी मूवमेंट खड़ा करके कुलपति के तानाशाही रवैये का विरोध किया जाएगा।
स्थापना दिवस के रोज होगा बड़ा आंदोलन
एबीवीपी इकाई सचिव अंकित ने विवि प्रशासन को चेताया है कि यदि अधूरे परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किए जाते और निष्कासित किए छात्रों का निष्कासन वापस न लिया गया तो एबीवीपी विवि के 22 जुलाई को मनाए जाने वाले स्थापना दिवस समारोह के दिन प्रदेश स्तरीय धरना प्रदर्शन करेगी। एबीवीपी पूरी ताकत के साथ विवि चलो के नारे के साथ कैंपस में मुख्यमंत्री के समक्ष बड़ा विरोध प्रदर्शन करने से भी गुरेज नहीं करेगी।