केंद्रीय आम बजट से हिमाचल को काफी उम्मीदें हैं। प्रदेश के बागवानों, किसानों, उद्यमियों, नौकरीपेशा लोगों से लेकर राज्य की मूलभूत सुविधाओं में इजाफे की आस जगी है। भाजपा के चारों सांसदों से लेकर सूबे की सरकार तक की निकाहें केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की पोटली पर टिकी हैं।
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सबने हिमाचल के लिए बजट में विशेष प्रावधान करने का अनुरोध किया है। सरकार की ओर से आग्रह किया गया है कि आम बजट में विदेशों से आयात किए जाने वाले सेब पर आयात शुल्क को 50 से बढ़ाकर 100 फीसदी किया जाए, जिससे प्रदेश में उत्पादित होने वाले सेब को अधिक से अधिक रेट मिल सकें।
शिमला एयरपोर्ट को विकसित करने के लिए भी आर्थिक मदद की जाए। केंद्रीय पोषित योजनाओं में केंद्र और राज्य के बीच 90 और 10 फीसदी का अनुपात तय किया जाए। अभी तक हर योजना के लिए अलग-अलग अनुपात तय है।
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आम बजट से ये उम्मीदें
प्रदेश में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए उद्योगों को आयकर में एक बार फिर से छूट देने की मांग की गई है। जल विद्युत परियोजनाओं के तेजी से निर्माण कराने के लिए पर्यावरण स्वीकृति का अधिकार भी हिमाचल को देने का मुद्दा उठा गया है।
बिलासपुर में एम्स और ऊना में ट्रिपल आईटी के निर्माण के लिए भी बजट देने का अनुरोध किया गया है। प्रदेश के नौकरी पेशा को उम्मीद है कि इस बार आयकर की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर तीन लाख की जाएगी। वहीं, प्रदेश को बिजली उत्पादन में जनरेशन टैक्स लगाने की अनुमति की भी आस है।
सांसद शांता कुमार का कहना है कि केंद्र से मांग थी कि हिमाचल को अधिक से अधिक बजट मुहैया कराया जाए। केंद्र ने मेरी बात सुन ली। 14 वें वित्त आयोग में रिकार्ड बजट का प्रावधान किया है।
नहीं बनी हिमालयन खेल अकादमी
हिमालयन रीजन के राज्यों की परंपरागत खेलों के अलग से प्रतियोगिता करवाने का ऐलान किया गया था। इसके तहत हिमाचल के अलावा जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम, जैसे नॉर्थ ईस्ट राज्यों में ये प्रतियोगिताएं करानी थीं।
इनमें नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों को भी बुलाए जाने का प्रावधान किया गया था, जोकि हिमालयन रीजन में आते हैं। इसके तहत अलग से हिमाचल प्रदेश में हिमालयन खेल अकादमी खोलनी थी।
सौर ऊर्जा हब पर नहीं हुआ काम हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के शीत मरुस्थल को सौर ऊर्जा का हब बनाने के लिए घोषणा की गई थी, लेकिन इस दिशा में भी धरातल पर आज तक कोई काम नहीं हो पाया है। तसवीर यह है कि इस प्रोजेक्ट को किस एजेंसी को बनाना है, आज तक यही तय नहीं हो पाया है। इस प्रोजेक्ट को लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच तालमेल की भी काफी हद तक कमी दिखी।
बजट से सीएम को भी उम्मीदें
सीएम वीरभद्र सिंह का कहना है कि केंद्रीय बजट में आम जन के कल्याण का बजट होने की आशा है। उम्मीद है कि केंद्र सरकार समाज के सभी वर्गों को लाभान्वित करने के लिए आम बजट में सभी पहलुओं पर विचार करेगी।
वहीं पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल का कहना है कि 14वें वित्त आयोग और रेलवे बजट में केंद्र की भाजपा सरकार ने हिमाचल पर धन की बरसात की है। उससे उम्मीद है कि शनिवार को पेश किए जाने आम बजट में भी प्रदेश्ा के लिए कुछ अच्छा ही मिलेगा।
सांसद अनुराग ठाकुर का कहना है कि केंद्रीय बजट में बिलासपुर में एम्स और ऊना को ट्रिपल आईटी मुहैया कराने के लिए वित्त मंत्री से अनुरोध किया है। उम्मीद है कि आम बजट में निश्चित तौर पर इसका प्रावधान किया जाएगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली शनिवार को संसद में बजट पेश कर रहे होंगे तो उस समय राज्य सरकार की निगाह भी जेटली की ‘पोटली’ पर टिकी होगी। आशंका जताई जा रही है कि केंद्रीय वित्त पोषित योजनाओं पर वित्त मंत्री कैंची चला सकते हैं।
खासतौर पर एनुअल प्लान, मनरेगा, एनएचएम, सहित तमाम योजनाओं में कट लगाया जा सकता है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि 14वें वित्त आयोग के जरिये केंद्र ने राज्यों का बजट काफी बढ़ा दिया है। तीन दिन पहले ही केंद्र की ओर से 14वें वित्त आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशें लागू कर दी गई थीं। इसमें हिमाचल को भारी-भरकम बजट मिला है।
13वें के मुकाबले 14वें वित्त आयोग ने बजट में तीन गुणा से अधिक की बढ़ोतरी की है। इसी के बाद से आशंका जताई जा रही है कि आम बजट में प्रदेश की केंद्र पोषित योजनाओं के बजट को कम किया जा सकता है। जानकारों का मानना है कि केंद्र की भी अपनी एक सीमा है। उसी के तहत बजट का प्रावधान किया जाता है। अगर 14वें वित्त आयोग में अधिक धन का प्रावधान कर दिया गया है तो निश्चित तौर पर एनुअल प्लान और मनरेगा आदि पर कट लग सकता है।