अपने घर के बाहर महिला बच्चों के साथ
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विमला देवी ने बताया कि दिसंबर 2007 में उन्होंने एसबीआई की शाखा नवगांव से पांच लाख रुपये होम लोन लिया था। समय पर किस्त भरती थीं। इस पर बैंक ने 2010 में ऋण में पांच लाख की बढ़ोतरी कर दी। लेन-देन ठीक था, जिसके चलते 2015 में कपड़ों की दुकान शुरू करने को बैंक ने 10 लाख का मुद्रा लोन भी पास कर दिया। तीन साल तक मुद्रा लोन की किस्त नियमित भरी। इसके बाद धोखाधड़ी का शिकार होने पर मार्च 2019 से फरवरी 2020 तक किस्त नियमित नहीं रख पाईं।
20 फरवरी, 2020 को उन्होंने खाते में 50 हजार रुपये जमा करवाए। हाउस लोन की किस्त रेगुलर भर रही थीं। मूलधन में से 6 लाख से अधिक की राशि बैंक को वापस कर दी। बैंक ने ब्याज, पेनल्टी और अन्य चार्ज जोड़कर बकाया राशि पांच लाख 66 हजार बना दी। इसमें एक लाख से अधिक सिर्फ ब्याज ही है। बैंक के पास घर और प्रॉपर्टी के कागज गिरवी हैं। उन्होंने सरकार और बैंक प्रबंधक से लोन चुकाने को मोहलत देने की मांग उठाई है।