मकान में 12 महीने से नहीं रह रहा था किरायेदार संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। राजधानी के संजौली इलाके में एक किराये के मकान से जुड़ा अहम मामला सामने आया है। रेंट कंट्रोलर (शिमला) एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह सिहाग की अदालत ने करीब 12 महीने तक बिना किसी उचित कारण के किराये के मकान में नहीं रहने पर बेदखली याचिका स्वीकार करते हुए किरायेदार को मकान खाली करने का आदेश दिया है।
संजौली निवासी याचिकाकर्ता दया चौहान ने हिमाचल प्रदेश शहरी किराया नियंत्रण अधिनियम, 1987 की धारा 14 के तहत बेदखली याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था कि उन्होंने वर्ष 2009 में प्रतिवादी आज्ञाराम चौहान को दो कमरे, एक रसोईघर, एक बाथरूम और एक बालकनी वाला परिसर किराये पर दिया था। आरोप था कि किरायेदार ने बिना किसी उचित कारण के लगातार 12 महीने से अधिक समय तक परिसर में रहना बंद कर दिया था और वह अपने पैतृक गांव में रह रहा था। किरायेदार ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि वह शिमला और अपने गांव आते-जाते रहते हैं। हालांकि अदालत में पेश किए दस्तावेजों और गवाहों की गवाही से इस मामले में स्थिति स्पष्ट हुई। बिजली बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार सितंबर 2021 से सितंबर 2022 के दौरान परिसर में बिजली की खपत मात्र 12 यूनिट रही। इसे परिसर में नियमित रूप से किसी के नहीं रहने के पक्ष में साक्ष्य माना गया। इसके अलावा किरायेदार अपने और अपने बेटे के शिमला में रहने के संबंध में ठोस दस्तावेज पेश करने में असफल रहे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों की जांच करने के बाद अदालत ने पाया कि मकान मालिक की ओर से लगाए गए आरोप साबित होते हैं। किरायेदार ने बिना किसी वैध कारण के लगातार 12 महीने तक परिसर का उपयोग नहीं किया। इसके आधार पर अदालत ने बेदखली याचिका स्वीकार करते हुए किरायेदार को विवादित परिसर खाली करने का आदेश दिया।