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शवयात्रा रोक बेटे ने पूरी की पिता की आखिरी ख्वाहिश

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मरणोपरांत अपने पिता की नेत्र दान की इच्छा को पूरा करने के लिए बेटे ने शवयात्रा को रोक लिया। इसके बाद डॉक्टरों को मौके पर बुलाकर आंखें दान करवाई। इसके बाद जाकर अंतिम संस्कार की विधियां पूरी की गई। मामला हिमाचल के सोलन के सुबाथू का है। यहां एक बेटे ने अपने पिता की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए मंगलवार को शव यात्रा को रोक दिया।
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उसने चंडीगढ़ से विशेष रूप से चिकित्सकों की टीम सुबाथू मंगवाई और पिता की आंखें सौंपने के बाद उनका अंतिम संस्कार करवाया गया। इस दौरान पूरे क्षेत्र के लोगों ने अंतिम संस्कार का इंतजार किया। सनातम धर्म सभा सुबाथू के संरक्षक और करीब 17 वर्ष पूर्व छावनी क्षेत्र के उपाध्यक्ष रहे प्रमोद मरवाह का बीते दिन चंडीगढ़ के फोर्टिस अस्पताल में हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया था।
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परिवारवालों को पता नहीं थी ये इच्छा

उनके साथ गए परिजनों को आंखें दान करने की उनकी इच्छा का पता नहीं था लेकिन उन्होंने इस बारे में अपने एक बेटे को बताया था। वह मर्चेंट नेवी में है। फोर्टिस अस्पताल से उनके शव को सुबाथू लाया गया। अंतिम यात्रा की पूरी तैयारी हो गई। शवयात्रा चलने लगी।

तभी उनके बेटे को इसका आभास हुआ और उसने शव यात्रा को रुकवा दिया। मरवाह परिवार ने उनकी इच्छा पूरी करने के लिए चंडीगढ़ के पीजीआई अस्पताल से संपर्क साधा और अंतिम यात्रा को रोक दिया गया। उनके नेत्रों को पीजीआई से आई डाक्टरों की टीम को सौंपा गया। उसके बाद ही दाह संस्कार हुआ।

मिलेगी प्रेरणा, याद रखेंगे योगदान
छावनी परिषद के उपाध्यक्ष दिनेश गुप्ता, रवि शर्मा, भूपेंद्र शर्मा, सुखदेव शर्मा, अनिल गुप्ता, सुमित, मनीष गुप्ता और अरविंद गुप्ता ने कहा कि सुबाथू के विकास के लिए प्रमोद मरवाह का योगदान विशेष रहा है। जिसे यहां की जनता हमेशा याद रखेगी। उन्होंने कहा कि नेत्रदान महादान है। जिसे इस परिवार ने सार्थक किया है। लोगों को नेत्रदान के लिए आगे आना चाहिए।
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