हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक किताब जल्द ही कई नेताओं के काले चिट्ठे खोलने के साथ साथ कई बड़े खुलासे करने वाली है। यह किताब जहां प्रदेश में सामने आए बहुचर्चित फोन टैपिंग मामले में कई अहम परतें खोलेंगी।
विज्ञापन
वहीं कई आला नेताओं का असली चेहरा भी सामने लाएगी। किताब को प्रदेश के पूर्व डीजीपी व इस केस के मुख्य आरोपी आईडी भंडारी लिख्ा रहे हैं। किताब के आने की खबरों से ही प्रदेश के राजनीति गलियारों में हड़कंप मच गया है।
बहुचर्चित फोन टैपिंग प्रकरण आधारित यह किताब तीन चार माह के भीतर पूरी हो जाएगी और इसके बाद इसे बाजार में उतारा जाएगा। किताब के 250 से अधिक पन्ने लिखे जा चुके हैं।
विज्ञापन
फोन टैपिंग की जांच से भी उठेगा पर्दा
इस किताब के शुरू के पन्नों में फोन टैपिंग के कानून से लेकर फोन कैसे टैप किए जाते हैं, इसको लेकर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके बाद प्रदेश सरकार के आदेशों के बाद विजिलेंस द्वारा सवा साल तक की गई जांच के रिजल्ट को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
किताब अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में होगी। वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद पूर्व भाजपा सरकार पर अवैध फोन टैपिंग के गंभीर आरोप लगाए थे।
सीआईडी टेक्निकल सेल से फोन टैपिंग से संबंधित कंप्यूटरों को सील कर फोरेंसिक जांच करवाई गई। इसके बाद सरकार ने फोन टैपिंग होने की पुष्टि का दावा किया। इस प्रकरण में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल तक को सरकार की ओर से निशाना बनाया गया है।
पुलिस विभाग की राजनीति की भी खुलेगी पोल
यह किताब प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचाएगी तो इसके साथ ही पुलिस विभाग के आला अफसरों की आपसी गुटबाजी और राजनीति को लेकर भी कई खुलासे करेगी।
हाल ही में जब आईडी भंडारी ने प्रैस वार्ता इस बारे में कई महत्वपूर्ण बातें कही थी। उन्होंने वर्तमान में प्रदेश पुलिस विभाग के महत्वपूर्ण पद पर बैठे दो अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया था।
उन्होंने दोनों पर उन्हें गलत तरीके से फंसाने का भी आरोप लगाया था। दोनों ही अफसर वर्तमान सरकार के करीबी है। अब देखना यह है कि किताब में वह पुलिस की इस गुटबाजी पर क्या खुलासे करते हैं।
आईडी भंडारी सरकार को दे चुके हैं चुनौती
जिस कार्यकाल के दौरान फोन टैपिंग के आरोप लगे उस समय आईडी भंडारी सीआईडी के प्रमुख थे। इसेक बाद में वे प्रदेश के डीजीपी भी बने, लेकिन फोन टैपिंग विवाद पर सरकार से हुए टकराव के बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया था।
भंडारी 30 अप्रैल को डीजी होमगार्ड के पद से रिटायर हुए। इसके बाद उन्होंने मीडिया में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। भंडारी सरकार को चुनौती दे चुके हैं कि अवैध फोन टैपिंग साबित करने वाले को एक लाख रुपये इनाम देंगे।
अब उनकी किताब सामने आ रही है। इस किताब के कई खुलासे सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं क्योंकि अभी इस केस में एफआईआर के बाद चार्जशीट फाइल नहीं हुई है।
पहले कहा सैंकड़ों फोन टैप हुए बाद में निकले सिर्फ चार
विपक्ष में रहते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कई बार इस बात को मीडिया में उजागर किया कि धूमल सरकार उनके फोन अवैध रूप से टैप रही है। 2012 के अंत में कांग्रेस के सत्ता में आते ही पहली कार्रवाई फोन टैपिंग को लेकर ही हुई।
सत्ता में आते ही सरकार ने सीआईडी और विजिलेंस से रातोंरात फोन टैपिंग से संबंधित दस्तावेज और कंप्यूटर जब्त किए गए। इसके बाद जांच बिठाई गई जिसमें 1100 से अधिक अवैध फोन टैप करवाने का खुलासा किया था।
26 जून 2013 में इस मामले में बेनाम एफआईआई दर्ज की गई। हाल ही में विजिलेंस ने भी इस मामले की जांच पूरी कर अवैध फोन टैपिंग की बजाय अवैध रूप से रिकॉर्डिगिं रखने का मामला बनाया है। मगर हैरानी इस बात की है कि जांच पूरी होने पर सिर्फ 4 फोन नंबर टैप होने की बात सामने आई थी।
पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी का कहना है कि इस किताब में कई बड़े खुलासे होंगे। चार साल में क्या-क्या हुआ सभी को एक्सपोज किया जाएगा। जिन्होंने गलत किया, कैसे गलत किया और क्यों गलत किया हर चीज को नाम और तथ्यों के साथ उजागर किया जाएगा।
किस तरह सरकार प्रदेश आम लोगों की संवेदनाओं से खेलती है। इसके बारे में बताया जाएगा। सिस्टम कैसे क्रप्ट हो रहा है उसके बारे में लिखा जा रहा है, ताकि प्रदेशवासियों को हकीकत का पता चल सके।