बहुचर्चित रामबाजार के चार वर्षीय बच्चे के अपहरण और हत्या मामले पर बुधवार को फैसला आने की हर किसी को पूरी उम्मीद थी। इसी के चलते पुलिस ने जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में सुबह दस बजे से पहले ही सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए थे। कोर्ट के मुख्य गेट पर पुलिस जवान तैनात थे। परिसर में जैसे-जैसे लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी, तो पुलिस के इंतजाम देखते ही हर कोई समझ गया कि युग मामले पर आज फैसला आना है।
10:15 बजे पर कंडा जैल से अपहरण हत्या मामले के तीनों दोषियों को पुलिस की जीप और क्यूआरटी वाहन के बीच कैदी वाहन से अदालत परिसर पहुंचाया गया। यहां पहले से कड़े किए गए सुरक्षा इंतजामों के बीच में सीधे तीनों दोषियों को कोर्ट के लॉकअप में ले जाया गया। इसके बाद अदालत में तीनों को पेश किए जाने और फैसले को लेकर अदालत की कार्रवाई शुरू होने का हर कोई इंतजार करता नजर आया।
1:47 बजे पर युग की मां, दादी, पिता और परिजन परिसर पहुंचे। 11:50 बजे तक अदालत में अन्य केस की सुनवाई चलती रही। इसके बाद एकाएक जज के उठकर अपने चैंबर में चले जाने पर फैसला सुनने के लिए परिजन और अधिवक्ता अदालत में बैठना शुरू हो गए।
अदालत पूरी तरह से भर चुकी थी। 1:53 बजे तीनों दोषियों को पुलिस सुरक्षा के बीच अदालत में पेश करने के लिए लाया गया। दो बजे अदालत ने युग मामले में फैसला सुनाने की प्रक्रिया शुरू की। जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत में दस मिनट के भीतर तीनों दोषियों को सजा सुनाई की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। सुरक्षा कारणों से तीनों को फिर से पुलिस लॉकअप में ले जाया गया। फैसला आने के बाद बाहर आते ही चंद सेकेंड में ही पूरे परिसर और मोबाइल पर फैसले को लेकर सूचना देने का क्रम तेजी से शुरू हो गया।
हर कोई कर रहा था फैसले की सराहना
परिसर में फैसले की हर कोई सराहना कर रहा था। चार वर्षीय बच्चे के अपहरण और हत्या का मामला होने के कारण हर कोई इसे अदालत का ऐतिहासिक फैसला करार दे रहा था। दोषियों को हुई सजा को पूरे समाज के लिए एक सबक बता रहा था। अधिवक्ताओं तक के बीच इस मामले को लेकर चरचा शाम पांच बजे तक बराबर चलती रही। फैसले से हर कोई खुश और संतुष्ट नजर आ रहा था, जिसे खुलकर बयां भी किया।