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जंगली फल खाने से छह स्कूली बच्चे गंभीर, आईजीएमसी में भर्ती

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शिमला/कोटखाई। पांदली पंचायत में प्राथमिक स्कूल सेवग से घर लौटते समय छह स्कूली बच्चों की जंगली फल खाने से तबीयत बिगड़ गई। बच्चों को पहले स्थानीय अस्पताल में उपचार दिया गया, जहां से उन्हें आईजीएमसी शिमला लाया गया। उल्टी-दस्त और बेहोशी से जूझ रहे बच्चों को आईसीयू में उपचार के बाद वार्ड में शिफ्ट किया गया है। हालांकि सभी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
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जानकारी के अनुसार शुक्रवार को नेपाली मूल के छह बच्चे रोज की तरह स्कूल से घर लौट रहे थे। इसी दौरान उन्होंने जंगली फल खा लिए। कुछ ही देर बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी। बच्चाें के साथ अनहोनी की आशंका पर परिजन उन्हें फौरन अस्पताल ले गए। कोटखाई अस्पताल में तैनात डॉ. सुनीश ने बताया कि अस्पताल पहुंचाए गए बच्चों के हाथ पांव नीले पड़ गए थे। प्राथमिक उपचार के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ।

ऐसे में सभी को आईजीएमसी रेफर कर दिया गया। इन बच्चों ने रास्ते में किसी जगली फल का सेवन किया था। उधर, आईजीएमसी में बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी सूद ने बताया कि बच्चों को उल्टी-दस्त हो रहे थे। कुछ बच्चे तो बेहोश तक हो गए। गंभीर हालत में इन्हें आईसीयू में आब्जर्वेशन पर रखा गया। उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार होने पर वार्ड में शिफ्ट किया गया है। वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक आईजीएमसी डॉ. जनक राज ने कहा, बच्चों की हालत स्थिर है।
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बच्चों की उम्र पांच से बारह साल के बीच
इन बच्चों की आयु पांच से बारह साल के बीच की है। खबर लिखे जाने तक एक बच्चा बेहोशी की हालत में था। वहीं, कुछ दिन पूर्व रोहड़ू से भी दो बच्चे इसी तरह की समस्या के बाद अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे थे।

धड़कन तेज, आंख-मुंह हो गए लाल
डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों में इस तरह के फलों का सेवन करने के चलते दिल की धड़कन बढ़ जाने के अलावा आंख व मुंह भी लाल हो गया था। इसके अलावा कुछ बच्चों को दौरे भी पड़ गए थे।
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