शिमला। जिले में मनरेगा के तहत काम कर रहे लाखों कामगारों को बीते चार महीने से मेहनताना नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से महंगाई के दौर में इनका घर चलाना मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं, कामगारों के अलावा मनरेगा सहायक और तकनीकी सहायकों को भी चार महीने वेतन से वंचित रहना पड़ रहा है। उधर, प्रशासन का दावा है कि इसके बारे में तीन बार लिखित में केंद्र सरकार को सूचित कर दिया गया है, अब चौथी बार लिखा गया है। संभावना है कि जल्द सरकार की ओर से मनेरगा की ग्रांट जारी हो जाएगी।
केंद्र सरकार ने जिले के कामगारों को करीब 47 लाख का भुगतान करना है। सरकार ने जिले के 1 लाख पंद्रह हजार कामगारों के अलावा सैकड़ों नरेगा और तकनीकी सहायकों को पिछले चार महीनों से मेहनताना नहीं दिया है। ऐसे में केंद्र सरकार से ग्रांट न मिलने के कारण जिले के लाखों कामगारों को घर चलाना मुश्किल हो गया है। बजट के अभाव में मनरेगा के पचास फीसदी पुराने कार्य अटके हैं, इसके अलावा नए विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं।
केंद्र सरकार को भेजी गई रिपोर्ट
केंद्र सरकार को मनरेगा की ऑडिट रिपोर्ट भेज दी गई है। करीब एक हफ्ते में मनरेगा मैटीरियल और कामगारों को मजदूरी के पैसे मिल जाएंगे।
आर सेल्वम, निदेशक एवं पदेन सचिव, ग्रामीण विकास हिमाचल प्रदेश सरकार।
जिले में ढाई लाख कामगार पंजीकृत
मौजूदा समय में जिले में करीब एक लाख पंद्रह हजार कामगार ऐसे हैं जो मनरेगा में मजदूरी कर रहे हैं। इनमें एसटी वर्ग के 32082, एसटी के 367, जबकि 82710 सामान्य वर्ग के कामगार हैं। इसमें महिलाओं की भागीदारी 53,498 है। जिले में 2,41,471 कामगार पंजीकृत हैं।
बीडीओ कार्यालय के काट रहे चक्कर
जिला ब्लॉक विकास अधिकारियों के मुताबिक मनरेगा में काम कर रहे कामगार हर रोज कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। पूछते हैं कि कब तक पैसे आएंगे। ऐसे में अधिकारी उनसे कहतेे हैं कि उन्होंने एफटीओ जनरेट कर दिए हैं। ग्रांट तो केंद्र सरकार से जारी होनी है।
मनरेगा के तहत ग्रांट न आने के कारण गौ शेड, टैंक, पक्के रास्ते, पक्की सड़कों और टायलेट के अलावा कई अन्य विकास कार्य ठप हो गए हैं।