प्रत्येक महीने 43.578 पेनल्टी जुड़ती रही। डॉ. चौहान ने डेढ़ साल बाद इसी वर्ष सितंबर 2018 को टीएमसी में मिला सरकारी आवास खाली किया। उन्होंने करीब 20 महीने अतिरिक्त सरकारी आवास पर कब्जा जमाए रखा। इसके चलते अब स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें साढ़े आठ लाख रुपये से अधिक की पेनल्टी लगाई है।
डॉ. अनिल चौहान ने बताया कि वर्ष 2016 में उन्होंने शिमला में निदेशक मेडिकल एजूकेशन के पद पर ज्वाइन किया। शिमला में कोई सरकारी आवास उपलब्ध नहीं था। वहां किराये के मकान में रहे। टीएमसी में पुराने आवास पर ढेर सारा सामान था, जिसे रखने की व्यवस्था नहीं थी।
टीएमसी में सरकारी आवास का निर्धारित किराया सितंबर 2018 तक चुकाया है। अब बकाया राशि का नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा है। स्वास्थ्य सचिव आरडी धीमान ने बताया कि मामले की जांच पूरी होने के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।