चुनावी सीजन में वोटों के खातिर भाजपा शासित नगर निगम अब अपना ही फैसला टालने में जुट गया है। जनता को राहत देने का दिखावा कर कूड़ा शुल्क बढ़ोतरी को टालने की कवायद शुरू हो गई है। हालांकि, प्रशासन ने इससे किनारा कर लिया है। महापौर कुसुम सदरेट ने साफ कह दिया है कि दो-तीन महीने तक कूड़ा शुल्क नहीं बढ़ाया जाएगा। महापौर के इस फैसले से शहरवासियों को तो चुनाव तक राहत मिल जाएगी लेकिन इसके बाद शुल्क बढ़ना तय है। उधर, निगम प्रशासन का भी फिलहाल इस फैसले पर साथ नहीं मिल रहा। अधिकारी कह रहे हैं कि सदन ने दस फीसदी शुल्क बढ़ोतरी का प्रस्ताव बहुमत से पारित किया है।
ऐसे में इसे लागू करना भी जरूरी है। अब इसे किस आधार पर कुछ माह के लिए टाला जाए, इसको लेकर माथापच्ची चल रही है। महापौर दावा कर रही हैं कि शहर में अभी सफाई व्यवस्था सुधरी नहीं है। ऐसे में शुल्क नहीं बढ़ाया जा सकता। दूसरी ओर प्रशासन सफाई व्यवस्था में चंडीगढ़ जैसे शहरों को पछाड़ने के बाद अब अगली रैंकिंग में बेहतर करने के दावे कर रहा है। बहरहाल जो भी हो, सियासी सरगर्मियों के बीच आम जनता को फिलहाल चुनाव तक ज्यादा शुल्क से राहत मिल सकती है।
पानी बिल में राहत देना नहीं आया याद
नगर निगम कूड़ा शुल्क में तो कुछ महीने राहत देने के दावे कर रहा है। लेकिन पानी बिल में राहत देना निगम को याद नहीं आया। इसे सरकार और कंपनी का फैसला बताकर निगम ने पल्ला झाड़ दिया था। इस महीने से शहर में पानी भी दस फीसदी महंगा हो चुका है।
अभी नहीं लेंगे बढ़ा हुआ शुल्क
महापौर कुसुम सदरेट ने कहा कि कूड़ा शुल्क पर भले ही सदन ने दस फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव पारित किया हो लेकिन अभी हम यह बढ़ोतरी नहीं करेंगे। शहर में अभी हर इलाके से नियमित कचरा नहीं उठ रहा। कहा कि जब तक लोगों को सफाई संबंधी नियमित सुविधाएं नहीं मिल जाती, तब तक शुल्क में इजाफा नहीं होगा। इस बारे में प्रशासन से भी चर्चा की जाएगी।