अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में बनी हिमुडा की कालोनियों में नगर निगम राहत और मरम्मत कार्य नहीं करेगा। नगर निगम ने इनमें काम करने से इंकार कर दिया है। इससे कालोनियों में रह रहे हजारों लोगों को तगड़ा झटका लगा है। निगम प्रशासन का कहना है कि यह कालोनियों हिमुडा ने बनाई हैं और इनमें निजी आवास चल रहे हैं। ऐसे में इनकी मरम्मत का जिम्मा हिमुडा अथवा इन्हीं परिवारों का है।
निगम सिर्फ कालोनियों के बाहर होने वाले सीवरेज, रास्ते, सड़कों आदि के मरम्मत कार्य करेगा। शहर में हिमुडा की कई कालोनियां हैं जिनमें हजारों लोग रह रहे हैं। कंगनाधार, विकासनगर, न्यू शिमला में इनकी संख्या ज्यादा है। हिमुडा का दावा है कि इन्हें एमसी को हैंडओवर किया जा चुका है। ऐसे में एमसी ही मरम्मत करेगा। उधर, अब एमसी ने प्रस्ताव पारित कर इसकी जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया है। बरसात के चलते इन कालोनियों में भारी नुकसान हुआ है। लोगों को अब खुद इनकी मरम्मत करनी होगी। मेयर कुसुम सदरेट ने कहा कि शहर में हजारों निजी संपत्तियां है जिनसे टैक्स लेकर निगम मरम्मत कार्य नहीं करता। निजी भूमि मालिक खुद इसके लिए जिम्मेेदार हैं। इसीलिए हिमुडा के लोगों को भी खुद मरम्मत कार्य करने होंगे।
खतरनाक पेड़ न हटाने पर भड़के पार्षद
महापौर कुसुम सदरेट की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई जीएफसी की बैठक में पार्षदों ने शहर के जंगल सरकार से वापस लेने का मामला उठाया। पार्षद राकेश चौहान ने बैठक में मौजूद वन विभाग के अधिकारियों से खतरनाक पेड़ काटने और उन्हें हटाने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। मांग की कि सरकार से शहर के जंगल वापस एमसी को देने के लिए कहा जाए। खतरनाक पेड़ों को काटने के प्रस्ताव कैबिनेट भेजने की बजाय ट्री कमेटी में ही मंजूरी देने का मामला उठाया जाए ताकि जनता को जल्द राहत दी जा सके। बैठक में शहर में गृहिणी योजना के तहत महिलाओं को गैस कनेक्शन देने की योजना पर अब सदन में प्रेजेंटेशन दी जाएगी। समिति ने इस पर संबंधित विभाग से विस्तृत जानकारी मुहैया करवाने को कहा ताकि सही महिलाओं का चयन इस योजना के लिए हो सके। बैठक में कच्चीघाटी के होटल, आईजीएमसी के पास बन रही पार्किंग, संकटमोचन में जेल विभाग का प्रशिक्षण केंद्र बनाने, एमसी से हाईकोर्ट को जमीन ट्रांसफर करने संबंधी प्रस्तावों पर सशर्त एनओसी देने पर सहमति बनी।