सर, प्रशिक्षु कंडक्टरों की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है, न तो आप उनकी सुध ले रहे हैं और न ही परिवहन निगम के अफसर आमरण अनशन पर बैठे कंडक्टरों की सुध लेने पहुंचे। अगर कुछ हो गया तो इसके जिम्मेवार आप और परिवहन निगम होगा।
मंगलवार को सचिवालय में जब प्रशिक्षु कंडक्टरों को मंत्री के कमरे में जाने का मौका नहीं मिला तो उन्होंने कमरे से बाहर निकलते वक्त परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर को घेर लिया। मंत्री के कमरे के बाहर दो महिला प्रशिक्षु कंडक्टरों ने मंत्री को बताया कि कंडक्टर प्रदेश सरकार से पॉलिसी की मांग कर रहे हैं।
पॉलिसी बनाना तो दूर, प्रशिक्षु कंडक्टरों को नौकरी से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया। कुछ प्रशिक्षु कंडक्टरों की सेवाएं बहाल की गईं, जबकि अधिकांश कंडक्टरों को वापस नहीं बुलाया गया। मंत्री को बताया कि प्रदेश भर से प्रशिक्षु कंडक्टर चौड़ा मैदान में डटे हैं, लेकिन उनकी सुध नहीं ली रहा जा रही है।
आमरण अनशन पर बैठे एक कंडक्टर के फेफड़े में इंफेक्शन तक हो गया है। सचिवालय में इन महिला प्रशिक्षु कंडक्टरों ने मंत्री को करीब 10 मिनट तक घेरे रखा। परिवहन मंत्री ने कंडक्टरों को आश्वासन दिया कि जल्द ही उनके मांगों पर विचार विमर्श किया जाएगा।