अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में ठप पड़े विकास कार्यों को शुरू करने के लिए नगर निगम को न सिर्फ चुनाव आयोग से अनुमति लेनी पड़ रही है बल्कि अब ठेकेदारों को भी काम के लिए राजी करना पड़ रहा है। निगम के सभी ठेकेदार जीएसटी और ईपीएफ जैसी मांगों को लेकर टेेंडरों का बहिष्कार कर रहे हैं। ऐसे में यदि चुनाव आयोग निगम को नए काम करने के लिए अनुमति दे भी देता है तो पहले प्रशासन को ठेकेदार तैयार करने होंगे। सभी ठेकेदार करीब दो माह से निगम के टेंडरों का बहिष्कार कर रहे हैं। अब निगम ने इसके लिए सभी ठेकेदारों को 18 नवंबर को होने वाली बैठक में बुलाया है। इसमें जीएसटी की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञ भी शामिल रहेंगे। साथ ही ईपीएफ विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। निगम इनके सहयोग से ठेकेदारों को काम के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा है। निगम ने ठेकेदार यूनियन को नोटिस जारी कर बैठक में शामिल होने को कहा है। नगर निगम आयुक्त जीसी नेगी का कहना है कि ठेकेदारों की मांगों पर चर्चा होगी। इसमें देखा जाएगा कि उनकी क्या-क्या मांगें पूरी की जा सकती हैं। नियमों के दायरे में रहकर ठेकेदारों को काम के लिए तैयार किया जाएगा।
इन दो मांगों पर अड़े हैं ठेकेदार
निगम और लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार जीएसटी और ईपीएफ की दो मुख्य मांगों को लेकर टेंडरों का बहिष्कार कर रहे हैं। ठेकेदारों का कहना है कि हर निर्माण कार्य पर जीएसटी ठेकेदार के खाते में डाला जा रहा है। ऐसा होने से ठेकेदार को लाभ मिलना तो दूर, उल्टे जेब से पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। मांग है कि जीएसटी को निगम वहन करे और इसे एस्टीमेट में ही शामिल किया जाए। साथ ही ईपीएफ को भी एस्टीमेट में शामिल करने की मांग है। ठेकेदार यूनियन अध्यक्ष पीएन शर्मा ने कहा कि हम मांगें पूरी न होने तक बहिष्कार जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि निगम ने जो बैठक बुलाई है, उसमें इन दोनों मांगों पर चर्चा होनी है। उसके बाद ही तय होगा कि काम करना है या नहीं।