‘कलम के सिपाही’ का स्वतंत्रता सेनानी रूप दिखाएगी रजा लाइब्रेरी
रामपुर। कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद न सिर्फ विश्वस्तरीय साहित्यकार थे, बल्कि गांधी और सत्याग्रह से प्रभावित होकर स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उनके इस रूप की बहुत कम चर्चा होती है। उन्होंने न सिर्फ अच्छी खासी सरकारी नौकरी छोड़ी थी बल्कि कलम के अलावा भौतिक रूप से भी सत्याग्रह तथा स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था।
गोदान और कर्मभूमि जैसे अमर साहित्य के रचयिता मुंशी प्रेमचंद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। देश की आजादी में उनका और उनकी लेखनी का अहम योगदान है। मुंशी प्रेमचंद के जीवन से जुड़े ऐसे ही अनछुए पहलुओं से अब लोग रूबरू हो सकेंगे। इसके लिए रजा लाइब्रेरी द्वारा मुंशी प्रेमचंद की 137वीं जयंती पर राजभाषा विशेषांक पुस्तक के विमोचन के साथ ही प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा। सिर्फ मुंशी प्रेमचंद ही नहीं बल्कि देश के अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन और संघर्ष पर भी प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।
रजा लाइब्रेरी ज्ञान का अकूत भंडार है। मुगल सल्तनत से जुड़ी किताबों, दुर्लभ पांडुलिपियों और कैलीग्राफी को जनता तक पहुंचाने के बाद अब प्रदर्शनी के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जानकारी जनता तक पहुंचाने की कोशिश रजा लाइब्रेरी प्रशासन द्वारा की जा रही है। इसमें ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जिनके नाम पर समय की धूल चढ़ने से नई पीढ़ी उनके बारे में नहीं जान सकी, उनके बारे में युुवा पीढ़ी को बताया जाएगा। इसी क्रम में प्रसिद्ध साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद और देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद पर रजा लाइब्रेरी में जुलाई माह में प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।