सरकार खनन पट्टों को तो मंजूरी दे रही है लेकिन पट्टा धारकों को वैध खनन के लिए फॉरेस्ट कंजरवेशन एक्ट में वन और पर्यावरण मंजूरी नहीं मिल रही है। यह मंजूरी नहीं मिलने से प्रदेश के विभिन्न जिलों में 70 साइटों पर खनन कार्य शुरू नही हो पाया है। प्रदेश के जिन जिलों में वन भूमि खनन साइटों के साथ है, वहां यह समस्या गंभीर बनी है। इसका फायदा खनन माफिया जमकर उठा रहा है और सरकार को राजस्व के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा है।
सरकार अब तक कुल 187 साइटों की नीलामी कर चुकी है। सरकार नीलामी के समय ही कुल राशि का 25 फीसदी हिस्सा अग्रिम ले लेती है। शेष राशि वार्षिक आधार पर पर्यावरण मंजूरी के बाद वसूलती है। सिरमौर, कुल्लू, शिमला, सिरमौर, चंबा, सोलन, लाहौल-स्पीति और किन्नौर में अधिकांश खड्डों की साइटें वन भूमि के दायरे में आती हैं। इन जिलों में साइटों की नीलामी तो कर दी गई है लेकिन एफसीए की मंजूरी नहीं मिली है।
सिरमौर में वर्ष 2016 में पहले चरण में साइटों की नीलामी की गई थी लेकिन अभी तक पट्टा धारकों को एफसीए मंजूरी नहीं मिली है। ऐसी करीब 70 साइटों में खनन नीलामी के बाद भी खनन शुरू नहीं हो पाईं। ऐसी ही स्थिति प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी खनन साइटों की नीलामी के बाद एफसीए मंजूरी नहीं मिली है।
जियोलॉजिस्ट पुनीत गुलेरिया ने कहा कि खनन साइटों में वन भूमि लगती है, वहां एफसीए मंजूरी न मिलने से साइटों की नीलामी के बाद भी खनन शुरू नहीं हो सका है। सरकार ने अब तक 187 साइटों में खनन नीलामी की है।