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टूटे घर में रहने को मजबूर 67 साल ही कृष्णा, प्रशासन ने नहीं जाना दर्ज

Fri, 30 Aug 2019 04:53 PM IST
Krishan Singh शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, ऊना
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- फोटो : अमर उजाला
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..भरी बरसात में जब आसमान में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ बिजली कड़कती है तो खौफजदा वृद्ध महिला घर से बाहर भागती है। इस डर से कि कहीं इस बरसात में आधा टूट चुका घर न गिर जाए। 67 वर्षीय कृष्णा देवी के जीवन की दास्तां दर्द भरी है जिसे सुनने वाला कोई नहीं।

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हमीरपुर सुपर एक्सप्रेस हाईवे के किनारे समूर स्थित ढारानुमा मकान में जीवन के अंतिम वर्ष काटने को मजबूर वृद्धा कृष्णा की शादी दो मर्तबा हुई। दोनों पतियों की मौत हो चुकी है। पहले पति से कृष्णा को तीन संतानें हुईं, जबकि फौज में सेवारत रहे दूसरे पति से कोई भी संतान नहीं।

गरीबी और लाचारी में दिन काटने को मजबूर महिला तक कोई सरकारी मदद की लौ भी नहीं पहुंच पाई है। हैरत की बात है कि जिला कांगड़ा से संबद्ध समाजसेवी संजय शर्मा जब वीरवार को कृष्णा के घर पर पहुंचे तो वृद्ध महिला करीब डेढ़ दिन से भूखी थी।

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घर में खाने के लिए न तो राशन था और न ही कुछ अन्य सामान

- फोटो : अमर उजाला
 घर में खाने के लिए न तो राशन था और न ही कुछ अन्य सामान। संजय शर्मा ने महिला की मदद के प्रति हाथ बढ़ाते हुए एक साल के राशन का इंतजाम किया। उन्होंने जिला प्रशासन और जिला की समाजसेवी संस्थाओं से आग्रह किया है कि वृद्ध और बेबस महिला की मदद को आगे आएं।

कृष्णा देवी ने बताया कि उसकी दूसरी मर्तबा सैनिक जगदीश राव के साथ शादी हुई, लेकिन उसका परिवार रजिस्टर में कहीं नाम नहीं है। इसके चलते उसे कोई लाभ नहीं मिला।

कृष्णा के पास मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड तो है, लेकिन विधवा पेंशन तथा वृद्धावस्था पेंशन जैसी सरकारी योजनाएं का उसे कोई लाभ नहीं मिला। वृद्ध महिला के मकान में दरारें पड़ चुकी हैं, जो कभी भी गिर सकता है। उसने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
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