ठियोग (रामपुर बुशहर)।
राजधानी शिमला में जल संकट को लेकर आईपीएच विभाग की बनाई गई कमेटी ही जिम्मेदार है। इसका खुलासा उस समय हुआ जब अमर उजाला ने इस मामले की छानबीन की। शिमला में पेयजल आपूर्ति पूरा करने के लिए ठियोग की गिरी खड्ड का सहारा लिया जाता है। शिमला गिरी खड्ड के नाम से विख्यात पेयजल योजना राजधानी में लोगों की प्यास बुझाती है। लेकिन इस योजना की पाइपें जगह-जगह टूटी फूटी हैं, जिसकी कमेटी भी सुध नहीं ले रहीहै।
माईपुल के साथ लगते पंप से इस गिरी परियोजना का पानी राजधानी के लिए लिफ्ट किया जाता है, जो कि कई स्थानाें से गुजरते हुए शिमला पहुंचता है। पाइपें कई जगहों पर टूटने के कारण जहां पानी की बर्बादी हो रही है, वहीं कई गांवों को जोड़ने वाली यह सड़क भी इससे खराब हो रही है। इससे शिमला में भी पूरी तरह से पेयजल सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है। इतना ही नहीं थरमटी के श्याम सिंह, संदीप शर्मा, प्रदीप शर्मा, राम लाल वर्मा और जिया लाल ने बताया कि पानी की बर्बादी के अलावा लोगों की जमीनाें को भी नुकसान हो रहा है। लंबे समय से यह हाल है। कई बारआईपीएच विभाग को इसकी सूचना दी गई। लेकिन विभाग इन लाइनों की मरम्मत करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। हार कर जनता ने अमर उजाला हेल्पलाइन का सहारा लेकर समस्या से निजात दिलाने की मांग की है। विभाग की कमेटी में एई पद पर तैनात अधिकारी सुशील शर्मा ने बताया कि भारी बरसात के चलते वेल्डिंग का कार्य नहीं हो पाया है। विभाग लाइनाें को दुरुस्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।