पिछली सेवाओं को वरिष्ठता के लिए गिनने की याचिका खारिज
प्रदेश हाईकोर्ट ने एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एसीपी) योजना का लाभ लेने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इसमें याचिकाकर्ता ने योजना का लाभप्रदान करने और अपनी पिछली सेवाओं को वरिष्ठता के लिए गिनने की मांग की थी। न्यायाधीश सत्येन वैद्य की अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता एसीपी योजना के तहत लाभ के पात्र नहीं हैं। उनका नियुक्ति के समय पद व वेतनमान मूल और वर्तमान विभाग से भिन्न थे। याचिकाकर्ता ने सबसे पहले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में स्टेनो टाइपिस्ट के रूप में सेवा शुरू की थी। 1 नवंबर 1999 को वह प्रतिनियुक्ति पर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड में क्लर्क रूप में शामिल हुई और 21 सितंबर 2012 को उनकी सेवा स्थायी रूप से बोर्ड में समाहित कर दी गई। याचिकाकर्ता का दावा था कि 2003 में 8 साल की सेवा पूरी होने पर एसीपी योजना का लाभ मिलना चाहिए था। इसमें टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में उनकी पिछली सेवाओं को भी शामिल करना चाहिए था, लेकिन बोर्ड ने 31 दिसंबर 2003 को और फिर 10 अगस्त 2011 को उनके अनुरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि स्टेनो टाइपिस्ट और क्लर्क के पद समान नहीं थे। कहा गया कि बोर्ड में स्टेनो टाइपिस्ट का कोई पद नहीं था। अदालत ने पाया की याचिकाकर्ता ने स्वेच्छा से प्रतिनियुक्ति का विकल्प चुना था।
अधिवक्ता के रूप में नामांकन रद्द, अपील खारिज
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अधिवक्ता के रूप में नामांकन को रद्द करने वाली अपील को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने एकल जज के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसके तहत बार काउंसिल ने अधिवक्ता के रूप में नामांकित करने से इन्कार कर दिया था। कोर्ट ने दोहराया कि अपीलकर्ता इंद्रपाल सिंह एलएलबी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए पात्र नहीं थे और इसलिए वह अधिवक्ता के रूप में नामांकन के हकदार 3 नहीं हैं। अपीलकर्ता ने अपनी एलएलबी डिग्री हासिल करते समय आवश्यक स्नातक योग्यता पूरी नहीं की थी, जिससे उनका नामांकन नियमों के खिलाफ था। कोर्ट ने पाया कि एकल न्यायाधीश ने नियमों पर विधिवत विचार किया था।