हिमाचल प्रदेश में स्वीकृत 773 हाइड्रो परियोजनाओं में से 527 का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाया है। चुराह की बहुप्रतीक्षित साईकोठी-1 और साईकोठी-2 परियोजनाओं का शिलान्यास हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन मशीनें अब तक साइट पर नहीं पहुंची हैं। विधानसभा में विधायक हंसराज की ओर से पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने माना कि टेंडर प्रक्रिया अभी जारी है और निर्माण कार्य नवंबर के बाद ही शुरू हो सकेगा। लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में कुल 773 जलविद्युत परियोजनाएं स्वीकृत हैं, जिनकी कुल क्षमता 21,751 मेगावाट है। इनमें से 527 परियोजनाएं, जिनकी कुल क्षमता 7,621 मेगावाट है, अभी तक निर्माण चरण में नहीं पहुंच सकी हैं। चुराह विधानसभा क्षेत्र की साईकोठी-1 (15 मेगावाट) और साईकोठी-2 (18 मेगावाट) जलविद्युत परियोजनाओं की आधारशिला 4 अगस्त 2025 को रखी गई थी।
इन परियोजनाओं के लिए प्री-क्वालिफिकेशन टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और बोलियों का मूल्यांकन भी किया जा चुका है। अब टेंडर प्रक्रिया के दूसरे चरण को पूरा करने के बाद नवंबर तक कार्य आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के संबंध में सरकार ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम-2013 तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार की जा रही है। स्थानीय लोगों को रोजगार भी नीति प्रावधानों के अनुरूप दिया जाएगा। सरकार ने चांजू-द्वितीय जलविद्युत परियोजना की स्थिति भी सदन में रखी। 19.8 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना का निर्माण फरवरी 2018 में शुरू हुआ था और अगस्त 2021 में इसका निर्माण पूरा कर विद्युत उत्पादन आरंभ कर दिया गया। परियोजना में कुल 45 स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार दिया गया है।